रायपुर , दिसंबर 20 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स की भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है। चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि पिछले तीन महीनों से चल रही पीजी काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों में बार-बार बदलाव किए जाने के कारण स्थिति अत्यंत जटिल हो गई है और राज्य में "जीरो ईयर" का खतरा उत्पन्न हो गया है।
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि अखिल भारतीय मेरिट सूची जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य कोटे की सीटों में परिवर्तन कर दिया गया, जिसके चलते छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस करने वाले छात्रों का कोटा घटकर 25 प्रतिशत रह गया। इस निर्णय को लेकर मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कई छात्रों ने न्याय की गुहार लगाते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट और बिलासपुर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रकाशित नियम देश के अन्य राज्यों में प्रचलित सीट आवंटन प्रक्रिया के विपरीत हैं,उन्होंने कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को हाई कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह याचिका दायर नहीं की गई है। रिव्यू पिटीशन दाखिल होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के एमबीबीएस छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद है, लेकिन देरी के कारण पूरी पीजी भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है।यदि, पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की गई तो छात्रों को मार्च में संभावित सुनवाई तक इंतजार करना पड़ेगा।
डॉ. राकेश गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री पर अकर्मण्यता और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मांग की कि प्रारंभिक राजपत्र के अनुसार राज्य के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत कोटा पुनः बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह 50 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे और 50 प्रतिशत सीटें छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए आरक्षित कर बिना देरी के काउंसलिंग प्रारंभ की जानी चाहिए, ताकि जीरो ईयर की स्थिति से बचा जा सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित