शिलॉन्ग , जनवरी 15 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार खासी-जयंतिया क्षेत्र में प्रस्तावित रेलवे परियोजना पर सभी हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से व्यापक सहमति बनने के बाद ही आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, "हम बहुत स्पष्ट हैं, हम तभी आगे बढ़ने वाले हैं जब हम परामर्श करने और सभी को साथ लेने में सक्षम होंगे।"गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इस परियोजना पर विचार-विमर्श करने के लिए सर्वदलीय समिति का गठन किया था, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने अब तक इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए हाल ही में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कई राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए विपक्षी दलों से चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "चाहे हम सहमत हों या असहमत, जब तक हम बात नहीं करेंगे, हम कहीं नहीं पहुँच पाएंगे।" उन्होंने कहा कि सरकार ने रेलवे परियोजना पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय समिति बनाई थी, लेकिन कुछ पार्टियों ने भाग लेने से इनकार कर दिया।

मुख्यमंत्री ने सभी हितधारकों के साथ जुड़ने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, "हम लोगों को इसके लाभों के बारे में समझाना जारी रखेंगे और हम उनकी चिंताओं को दूर करने का प्रयास करेंगे और देखेंगे कि क्या हम किसी सहमति बिंदु पर पहुँचने में सक्षम हैं, जिसके बाद हम इसे दिल्ली ले जा सकेंगे।"श्री संगमा ने स्वीकार किया कि यह एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और इसके लिए सावधानीपूर्वक तथा समावेशी विचार की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि प्रभावशाली खासी छात्र संघ (केएसयू) सहित विभिन्न समूहों ने मेघालय में रेलवे का विरोध किया गया है, जिनका दावा है कि इससे बाहरी लोगों की आमद को बढ़ावा मिलेगा। केएसयू ने कहा कि जब तक सरकार राज्य में 'इनर लाइन परमिट' (आईएलपी) व्यवस्था लागू नहीं करती, तब तक वे खासी-जयंतिया हिल्स क्षेत्र में रेलवे परियोजना का पुरजोर विरोध करना जारी रखेंगे।

आईएलपी एक विशेष परमिट है, जो देश के अन्य क्षेत्रों के निवासियों को अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर में प्रवेश करने के लिए आवश्यक होता है। उल्लेखनीय है कि 19 दिसंबर, 2019 को मेघालय विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव अपनाया था, जिसमें केंद्र सरकार से 'बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873' की प्रस्तावना में मेघालय को शामिल करके राज्य में आईएलपी व्यवस्था शुरू करने का आग्रह किया गया था।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित