शिलांग , अप्रैल 22 -- मेघालय उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि बंगला सीमा पर पत्थरों और अन्य खनिजों के परिवहन में लगा कोई भी वाहन बिना वैध खनिज परिवहन चालान या अन्य आवश्यक दस्तावेजों के भूमि सीमा शुल्क केंद्रों और वन विभाग के चेकपोस्ट से न गुजरे।

मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहित डेरे और न्यायमूर्ति हमरसन सिंह थांगख्यू की पीठ ने मंगलवार को जारी एक अंतरिम निर्देश में अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि खनिज ले जाने वाले वाहनों के पास सड़क पर चलने के लिए आवश्यक फिटनेस प्रमाणपत्र और वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से हो।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने निर्देश दिया, "संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाएं कि खनिज केवल लाइसेंस प्राप्त और अनुमति वाले क्षेत्रों से ही निकाले जा रहे हों। साथ ही, संबंधित अधिकारी खानों और खनिजों के परिवहन से संबंधित नियमों व कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।" अदालत ने स्पष्ट किया कि उल्लंघन करने वाले वाहनों को उनके माल सहित जब्त किया जा सकता है।

अदालत ने 15 अप्रैल 2026 के एक पत्र के आधार पर इस याचिका पर स्वत: संज्ञान लिया था। इस पत्र में चिंता जताई गई थी कि बड़ी संख्या में भारी वाहन कानून का उल्लंघन करते हुए बंगलादेश सीमा की ओर, विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 206 पर पत्थरों और अन्य खनिजों के परिवहन में लगे हुए हैं।

पत्र में आरोप लगाया गया था कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और लागू कानूनों के उल्लंघन में खनिजों का परिवहन किया जा रहा है और उपयोग किए जा रहे वाहनों पर पंजीकरण प्लेट (नंबर प्लेट) तक नहीं हैं। पत्र में खनिजों के कथित अवैध निष्कर्षण, भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सार्वजनिक सड़कों को होने वाले नुकसान, स्थानीय निवासियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव और पर्यावरण के क्षरण को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

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