पटना , दिसंबर 29 -- बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने सोमवार को कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि किसान के खेत का वैज्ञानिक मार्गदर्शक दस्तावेज है, जिसके माध्यम से किसानों को अपने खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की सटीक जानकारी प्राप्त होती है।

श्री यादव ने आज बयान जारी कर कहा कि इस प्रक्रिया से मिटटी जांच रिपोर्ट के आधार पर फसल एवं रकबे के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग की स्पष्ट अनुशंसा दी जाती है, जिससे अनावश्यक और अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी आती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में केन्द्र प्रायोजित मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना का राज्यभर में प्रभावी एवं सुनियोजित क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे किसानों की मिट्टी स्वस्थ रहे और उनकी मेहनत का पूरा फल उन्हें मिल सके।

श्री यादव ने कहा है कि बिहार सरकार किसानों की खेती को वैज्ञानिक, लाभकारी और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी संकल्प के तहत केन्द्र प्रायोजित मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना का राज्यभर में प्रभावी एवं सुनियोजित क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे किसानों की मिट्टी स्वस्थ रहे और उनकी मेहनत का पूरा फल उन्हें मिल सके।

मंत्री श्री यादव ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के लिए 3.00 लाख मिट्टी नमूनों के संग्रहण एवं विश्लेषण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 2.95 लाख मिट्टी नमूनों का संग्रहण किया जा चुका है, जबकि 2.09 लाख नमूनों का विश्लेषण पूर्ण कर किसानों को उनके खेत के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जा चुका है। शेष नमूनों का विश्लेषण भी शीघ्र पूर्ण करने के लिए कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक पहल है। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ खेती की लागत घटाने और आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है।उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखना, पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करना और किसानों की लागत कम कर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से भूमि की सेहत सुधरती है, जल संसाधनों का संरक्षण होता है और खेती अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ बनती है।

श्री यादव ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि वे मिशन मोड में कार्य करते हुए शेष लक्ष्य को समयबद्ध रूप से पूर्ण करें, जिससे राज्य का हर किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लाभ प्राप्त कर सकें । उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार की कृषि व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी तथा किसानों को इसका प्रत्यक्ष और स्थायी लाभ प्राप्त होगा।

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