हैदराबाद , मार्च 18 -- भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने बुधवार को प्रस्तावित मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तेलंगाना विधानसभा से वॉकआउट किया।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधायक के. टी. रामाराव ने कहा कि पार्टी मूसी नदी के पुनर्जीवन का समर्थन करती है, लेकिन परियोजना के नाम पर "1.5 लाख करोड़ रुपये की लूट" का कड़ा विरोध करती है। सत्र के दौरान रामाराव और अन्य बीआरएस विधायकों ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की अनुपस्थिति, लागत में वृद्धि, भूमि अधिग्रहण योजना और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण जैसे कई मुद्दों पर सरकार से सवाल किए।

उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों में विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां मुख्यमंत्री ने परियोजना लागत 1.5 लाख करोड़ रुपये बताई है, वहीं विधानसभा में केवल 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये का अनुमान प्रस्तुत किया गया है। श्री रामाराव ने आरोप लगाया कि आधिकारिक अधिसूचनाओं के अनुसार 10,000 से अधिक घरों को ध्वस्त किया जा सकता है और 3,260 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है।

उन्होंने बफर जोन के विस्तार और उसके दायरे और मानदंडों को लेकर स्पष्टता के अभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नदी से दूर स्थित क्षेत्रों में भी नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन पर संदेह पैदा होता है। श्री रामाराव ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि डीपीआर के अस्तित्व को लेकर भी स्पष्ट पुष्टि नहीं की गयी है। उन्होंने दावा किया कि मूसी नदी विकास निगम ने भी संकेत दिया है कि कोई डीपीआर उपलब्ध नहीं है। पार्टी ने यह भी आपत्ति जताई कि सरकार प्रभावित लोगों से सीधे संवाद करने के बजाय निजी स्थलों पर प्रस्तुतियां दे रही है।

उन्होंने कांग्रेस पर इस परियोजना का वित्तीय लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और मांग की कि यदि डीपीआर तैयार है तो उसे विधानसभा में पेश किया जाए। उन्होंने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से वित्तपोषण के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मार्च मध्य तक कोई ऋण स्वीकृत नहीं हुआ है। डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उन्होंने एक निजी कंपनी की भूमिका और रिपोर्ट तैयार करने की गति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन विसंगतियों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए, अन्यथा उस पर विधानसभा और जनता को गुमराह करने के सवाल उठेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित