नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- विकसित भारत और मिशन 2047 के संकल्प पर केंद्रित बुधवार को यहां आयोजित मुस्लिम महिला बौद्धिक सम्मेलन राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सद्भाव और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का सशक्त मंच बनकर उभरा।

राजधानी के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आई शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर मुस्लिम महिलाओं ने न सिर्फ अपने विचार साझा किए, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे भारत के विकास की यात्रा में पूरी मजबूती के साथ सहभागी हैं।

सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने की। अपने संबोधन में उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस देश के मुसलमान कोई किरायेदार नहीं, बल्कि इस मुल्क के मकान मालिक हैं। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद जिन्होंने भारत को अपना वतन चुना, वे भारतीय थे, भारतीय हैं और भारतीय ही रहेंगे। भारत से मुसलमानों का रिश्ता केवल रहने का नहीं, बल्कि मोहब्बत, जिम्मेदारी और अपनत्व का है।

डॉ. इंद्रेश कुमार ने समाज को बांटने वाली ताकतों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे तत्व हर समाज में होते हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम होती है। हमें अपने बच्चों की तालीम, अपने समाज और देश के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भविष्य बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है और इस जिम्मेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ महिलाएं हैं। बेटा और बेटी में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। चाहे खुद कम सुविधाओं में रहना पड़े, लेकिन बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा देना हमारा सामूहिक मिशन होना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार नगमा सहर ने शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि तालीम का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि आज मुस्लिम महिलाएं कई मामलों में मुस्लिम लड़कों से भी अधिक गंभीरता और समर्पण के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों की शिक्षा को सीमित करने के बजाय उन्हें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

समाजसेवी डॉ. शालिनी अली ने महिलाओं की बहुआयामी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं बेटी, मां और समाज की मार्गदर्शक के रूप में अहम जिम्मेदारी निभाती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि नफरत और भ्रम फैलाने वाले कंटेंट को पहचानना और रोकना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। बिना सत्यता जांचे किसी भी सामग्री को साझा करना समाज और देश दोनों के लिए नुकसानदेह है।

वक्फ बोर्ड की सदस्य साबिहा नाज ने मुस्लिम समाज में शैक्षिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है।

सम्मेलन का समापन तालीम, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण के मजबूत संदेश के साथ हुआ। यह बौद्धिक पहल न सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के आत्मविश्वास को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि वे विकसित भारत के निर्माण में पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार हैं।

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