कोलकाता , जनवरी 20 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बार-बार हो रही हिंसा की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो केंद्र सरकार एनआईए जांच का आदेश दे सकती है।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को इलाके में पहले से तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने और कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिये उठाये गये कदमों पर 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत हलफनामा जमा करने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इलाके में जान-माल का कोई नुकसान न हो।

पीठ ने अपनी टिप्पणियों में कहा कि इलाके में बार-बार हिंसा भड़कना "बेहद चिंताजनक" है और पुलिस और सरकारी संपत्ति पर हमले, साथ ही एक राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक करना, नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने एनआईए जांच की मांग पर साफ किया कि एनआईए अधिनियम की धारा 6(5) के तहत केंद्र सरकार के पास यह अधिकार है कि अगर उसे सही लगे तो वह ऐसी जांच का आदेश दे सकती है।

इसके साथ ही पीठ ने राज्य को निर्देश दिया कि वह मुर्शिदाबाद में पहले से तैनात सीएपीएफ इकाइयों का पूरी तरह से इस्तेमाल करे और हिंसा को दोबारा होने से रोकने के लिये खुफिया जानकारी का सुचारू रूप से इस्तेमाल करे। इस मामले पर अग्रिम सुनवाई चार हफ़्ते बाद होगी।

न्यायालय ने जो बेलडांगा में हालिया हिंसा से संबंधित कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां की। इनमें से एक याचिका पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी ने भी दायर की थी।

बेलडांगा में अशांति झारखंड के एक प्रवासी मजदूर की मौत के बाद शुरू हुई और शुक्रवार और शनिवार को बढ़ गयी, जिससे बड़े पैमाने पर तनाव फैल गया। तोड़फोड़, रेल नाकाबंदी, राष्ट्रीय हाईवे-12 पर विरोध प्रदर्शन, पत्रकारों पर हमले और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने की खबरें आयीं।

याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान इलाके को अत्यधिक संवेदनशील बताया और आरोप लगाया कि हिंसा विरोध प्रदर्शनों की आड़ में पूर्व-नियोजित थी। उनके वकील ने तर्क दिया कि पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया, पत्थर फेंके गए, ट्रैफिक जाम हो गया और स्थिति की गंभीरता के बावजूद धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू नहीं की गयी। यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्रीय बल मौजूद होने के बावजूद, राज्य प्रशासन ने उनका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित