, April 15 -- नागपुर 15 अप्रैल वार्ता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को यहां भारतीय राजस्व सेवा ( आईआरएस) के प्रशिक्षु अधिकारीयों के 78वें बैच के विदाई समारोह में भाग लिया ।
इस अवसर पर श्रीमती मुर्मु पने संबोधन में कहा कि आईआरएस अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कानून का अनुपालन सुनिश्चित करना ही नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिकों, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों से संबंधित लोगों के साथ गरिमा और निष्पक्षता से व्यवहार किया जाए।
नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा उल्लेखनीय रूप से गतिशील और प्रेरणादायक रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर वृद्धि कर अनुपालन में सुधार और कर आधार के विस्तार का संकेत देती है। यह नागरिकों और प्रशासन के बीच बढ़ते विश्वास को भी दर्शाती है। उन्होंने इस वर्ष पहली अप्रैल से लागू नए आयकर अधिनियम, 2025 को इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह सुधार एक आधुनिक, सरलीकृत और पारदर्शी कर व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसकी वास्तविक सफलता केवल इसके सटीक, पारदर्शी और प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है और यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आयकर विभाग के अधिकारियों के कंधों पर है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों की भूमिका केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है। वे जनता के भरोसे के संरक्षक हैं; वे न्याय और निष्पक्षता के रक्षक हैं। वे देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और सुशासन के स्तंभ हैं। उन्होंने युवा अधिकारियों को याद दिलाया कि विनम्रता, संयम और संवेदनशीलता उनके पेशेवर आचरण के अभिन्न अंग होने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी नियमों को लागू करने तक ही सीमित नहीं है। इसमें प्रशासनिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करना भी शामिल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा पर आधारित निर्णय न केवल शासन को सुदृढ़ करते हैं बल्कि राष्ट्र और उसके नागरिकों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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