मुरादाबाद , अप्रैल 29 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जमीन अधिग्रहण के एक पुराने मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लंबित याचिका खारिज किए जाने के बाद मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने बुधवार से अधिग्रहित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इसके साथ ही पिछले ढाई दशक से चला आ रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया।

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) के सचिव पंकज वर्मा ने बुधवार को बताया कि दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-09 स्थित मंगूपुरा गांव की भूमि अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। यह मामला 'नया मुरादाबाद योजना' के अंतर्गत आवासीय और व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए अधिग्रहित भूमि से संबंधित था।

उन्होंने बताया कि मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम की ओर से दायर याचिका में एमडीए की अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि गाटा संख्या 498 और 499 पर वर्ष 1979-80 से शैक्षणिक संस्थान संचालित हो रहा है तथा उन्हें न तो मुआवजा मिला और न ही भूमि का भौतिक कब्जा लिया गया, इसलिए नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत इस अधिग्रहण को निरस्त माना जाए।

एमडीए की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ने न्यायालय को प्रमाणों के साथ बताया कि संबंधित तीन हेक्टेयर भूमि का कब्जा सात नवंबर 2000 को ही ले लिया गया था और निर्धारित मुआवजे की राशि भी सरकारी खजाने में जमा कर दी गई थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अधिग्रहण की विधिक प्रक्रिया काफी पहले पूर्ण हो चुकी है, इसलिए अब इस मामले में किसी भी प्रकार के न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार, अदालत ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता पूर्व में भी चार बार इस अधिग्रहण को चुनौती दे चुका है, जिन्हें अलग-अलग समय पर निस्तारित अथवा खारिज किया जा चुका था। वर्ष 2004 में मदरसा कमेटी द्वारा दायर अपील 2005 में खारिज हो गई थी, जबकि 2007 में भी उनका दावा निरस्त कर दिया गया था।

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