मुरादाबाद, अप्रैल 30 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) के बीच पिछले ढाई दशकों से चला आ रहा भूमि विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां कानूनी हार और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने इसे देश की सर्वोच्च अदालत तक ले जाने का ऐलान किया है। जिले के मझोला थाना क्षेत्र के गांव मंगूपुरा स्थित लगभग तीन हेक्टेयर की इस बेशकीमती जमीन पर एमडीए द्वारा बुलडोजर चलाकर कब्जा लिए जाने की कार्रवाई बुधवार को तब शुरू हुई, जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मदरसे की याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए खारिज कर दिया। एमडीए सूत्रों ने बताया कि इस अदालती आदेश के तत्काल बाद एमडीए प्रशासन द्वारा भारी पुलिस बल के साथ गाटा संख्या 498 और 499 पर चारदीवारी समेत अन्य निर्माण कार्य बुधवार से जारी हैं, जो 'नया मुरादाबाद आवासीय योजना' का हिस्सा है।
इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सपा नेता एवं पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने पत्रकारों के साथ बातचीत में बृहस्पतिवार को इसे तालीमी इदारों के साथ नाइंसाफी करार दिया है और स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय में कमजोर पैरवी के कारण केस हारने के बावजूद संस्था अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
डॉ. हसन का तर्क है कि इस जमीन का अधिग्रहण1980 के दंगों के बाद की विशेष परिस्थितियों में हुआ था, जिसे मदरसा प्रबंधन ने कभी स्वीकार नहीं किया और मुआवजे की राशि आज भी सरकारी खजाने में बिना छुए जमा है। उनका मानना है कि शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य से स्थापित संस्थानों के प्रति प्रशासन को मानवीय आधार पर नरम रुख अपनाना चाहिए, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील करने की बात कही है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित