सुकमा , फरवरी 14 -- छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले के ग्राम पूवर्ती में उस समय सनसनी फैल गई जब मारे गए नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे के चिता स्थल पर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आए लोग पारंपरिक पूजा-पाठ करते पाए गए।

बताया गया कि करीब 70-80 लोग श्मशान घाट पहुंचे और क्रियाकर्म किए, जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

बस्तर रेंज के आईजी पी.सुंदरराज ने इस मामले में पुलिस कार्रवाई कर सकती है की बात कही है।

ग्रामीणों ने बाहरी लोगों की मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गांव और श्मशान से जुड़े कार्य वे स्वयं कर सकते हैं, बाहरी लोगों की इसमें कोई आवश्यकता नहीं है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी लोगों को हिरासत में लेकर सुकमा ले गई, जहां देर रात पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस ने इसे एहतियातन कार्रवाई बताते हुए क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि माड़वी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे को आंध्र प्रदेश पुलिस ने 18 नवंबर 2025 को अल्लुरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिल्ली जंगल में एक मुठभेड़ में मार गिराया था । पोस्टमार्टम के बाद दोनों के पार्थिव शरीर परिवार को सौंप दिए गए और 20 नवंबर 2025 को उनके पैतृक गांव पूवर्ती में पारंपरिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया । इस दौरान हिड़मा को काली पैंट-शर्ट और उसकी पत्नी को लाल जोड़ा पहनाकर एक ही चिता पर अग्नि दी गई थी।

इस बीच आईजी पी. सुंदरराज ने इस घटना पर कहा, "माड़वी हिड़मा के चिता स्थल पर दूसरे राज्य के लोगों का आकर उसे सलाम या पूजा-पाठ करना उचित नहीं है। इस बारे में उचित कार्रवाई पुलिस के द्वारा की जा सकती है।"गौरतलब है कि हाल ही में भूमकाल दिवस पर हिड़मा के नाम पर गीत बजाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद भी विवाद हुआ था। हिड़मा पर 2010 में 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत और 2013 के झीरम घाटी हमले सहित कई बड़ी नक्सली घटनाओं को अंजाम देने के आरोप हैं ।

भूमकाल दिवस के दिन आदिवासी समाज की रैली के दिन यह गाना बजा था, कानून व्यवस्था के लिहाज से लगी पुलिस ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स को पढ़ने के बाद सर्व आदिवासी समाज की ओर से सफाई दी गई थी कि पूरा समाज नक्सलियों के खिलाफ और सरकार के साथ है। म्यूजिक सिस्टम यूट्यूब से कनेक्टेड था। एल्गोरिद्म सुविधा के कारण यह गाना बजा था, तेज धुन नाच रहे बच्चों को यह नहीं पता था कि यह आखिर क्या गाना है। सर्व आदिवासी समाज यह नहीं जानता है कि यह गाना किसने लिखा है क्यों लिखा है तथा किसने बनाया है, हम सरकार के साथ हैं।

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