पटना , अप्रैल 27 -- बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति की ओर से "ज्ञान भारतम् मिशन" के अंतर्गत राज्य में पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन को लेकर सोमवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में राज्य के सभी जिला पदाधिकारियों के साथ पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और सत्यापन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि 09 अप्रैल, 2026 से 27 अप्रैल, 2026 के बीच राज्य में पांडुलिपियों के सर्वेक्षण में भारी प्रगति हुई है। सत्यापित सर्वेक्षणों की संख्या 53 से बढ़कर 707 हो गई है।सत्यापित पांडुलिपियों की कुल संख्या 7,49,923 तक पहुँच गई है, जो पहले 3,69,554 थी।मिशन के तहत अब राज्य के सभी 38 जिले आच्छादित हो चुके हैं.।पांडुलिपि सत्यापन के आधार पर बिहार अब राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान (रैंक-3) पर आ गया है, जबकि पहले यह पांचवें स्थान पर था।
भारत में कुल सर्वेक्षित पांडुलिपियों (61,82,827) में बिहार की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत है. राजस्थान (14,49,867) और मध्य प्रदेश (10,12,516) के बाद बिहार 7,49,923 पांडुलिपियों के साथ देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। सत्यापित एवं स्वीकृत पांडुलिपियों के मामले में मधुबनी (3,96,487) राज्य में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद गया (1,11,398), सीतामढ़ी (85,441), पटना (52,548) और दरभंगा (24,139) का स्थान है. सबसे कम पांडुलिपियाँ जमुई (10) जिले में दर्ज की गई हैं।
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