कोलकाता , दिसंबर 27 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पांच जनवरी को गंगासागर के दौरे पर जाने वाली हैं और इसे देखते हुए राज्य सरकार और दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन अगले साल गंगासागर मेले में आने वाले भारी संख्या में तीर्थ यात्रियों की व्यवस्था के लिए विस्तृत तैयारियां कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने पहले ही राज्य प्रशासन को किसी भी प्रकार की वीआईपी संस्कृति से दूर रहने की चेतावनी दी है। वह पांच जनवरी को गंगासागर पहुंचेंगी, जहां वह तैयारियों, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों का आकलन करने के लिए जिला अधिकारियों के साथ प्रशासनिक समीक्षा करेंगी।
सुश्री बनर्जी द्वारा क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने की भी उम्मीद है। इस वर्ष एक करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों के आधिकारिक अनुमान को देखते हुए राज्य सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है जिसमें लगभग 13 हजार पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा 1150 से 1200 के बीच सीसीटीवी कैमरे और 20 ड्रोन भी तैनात किए जाएंगे। इन सभी की निगरानी एक मेगा कंट्रोल रूम से की जाएगी। इसके अलावा, आपदा प्रतिक्रिया दल भी तैनात किए जाएंगे जिनमें 2,500 से अधिक नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक, नवगठित डॉग स्क्वाड सहित एनडीआरएफ इकाइयां और भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के कर्मी शामिल होंगे।
परिवहन व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। नदी पार करने के लिए 21 घाटों के माध्यम से 32 पोत, 9-10 बजरा और 120 नौकाएं संचालित की जायेंगी। कोलकाता और काकद्वीप के बीच लगभग 2,250 सरकारी बसें और 250 निजी बसें आवागमन की सुविधा प्रदान कर रही हैं। सर्दियों के घने कोहरे से निपटने के लिए, ऑस्ट्रेलिया से आयातित विशेष एंटी-फॉग लाइटें मुरीगंगा नदी मार्ग पर लगाई गई हैं, जिससे फेरी सेवाएं प्रतिदिन 20 घंटे तक संचालित हो सकेंगी।
व्यवस्था के प्रभारी एक वरिष्ठ राज्य सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पहली बार, मार्ग परिवर्तन को रोकने के लिए पोतों और बसों की ट्रैकिंग हेतु आईएसआरओ द्वारा विकसित जीपीएस-आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।"तीर्थयात्रियों के लिए कई डिजिटल पहल भी शुरू की गई हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों के लिए क्यूआर कोड-सक्षम वाटरप्रूफ रिस्टबैंड, आवश्यक सुविधाओं का पता लगाने के लिए एक सार्वभौमिक क्यूआर प्रणाली और 'बंधन' पहल के तहत एक स्मारक प्रमाण पत्र शामिल हैं। ई-स्नान और ई-दर्शन जैसी वर्चुअल सेवाओं के माध्यम से श्रद्धालु दूर से भी दर्शन कर सकेंगे।
राज्य सरकार ने मजबूत स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना भी स्थापित की है, जिसमें कुल 515 बिस्तरों वाला अस्पताल (आईसीयू सहित), 100 एम्बुलेंस, चार जल एम्बुलेंस और एक हवाई एम्बुलेंस शामिल हैं, ताकि तीर्थयात्रियों की किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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