हैदराबाद , मार्च 27 -- डॉ. बी.आर. अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय (बीआरएओयू) के कुलपति घंटा चक्रपाणि ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा दूरस्थ शिक्षा संस्थानों पर लगाए जा रहे कड़े नियमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
श्री चक्रपाणि ने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 'बियॉन्ड बाउंड्रीज: द न्यू ओडीएल लैंडस्केप' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के गुरूवार को समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ये कड़े नियम सार्वजनिक क्षेत्र के विश्वविद्यालयों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं।
कुलपति चक्रपाणि ने आरोप लगाया कि कुछ कॉर्पोरेट कॉलेजों को राज्य सरकारों की जानकारी के बिना बहुत कम समय में 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' में बदला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की प्रवृत्तियां शिक्षा को एक कॉर्पोरेट वस्तु बना रही हैं, जिससे वंचित छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच कठिन होती जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि बीआरएओयू अन्य मुक्त विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर अगले शैक्षणिक वर्ष से नए कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति नवीन चंद्र लोहानी ने दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) प्रणाली की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहां चीन में मुक्त विश्वविद्यालय पारंपरिक संस्थानों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं भारत में पर्याप्त धन की कमी के कारण ये संस्थान परिचालन संबंधी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। कुलपति लोहानी ने सरकार से इस क्षेत्र के लिए वित्त पोषण बढ़ाने की अपील करते हुए संस्थानों को आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर 'इंडियन डिस्टेंस एजुकेशन एसोसिएशन' (आईडिया) के अध्यक्ष के. सीताराम राव ने कहा कि नियामक निकायों द्वारा मुक्त विश्वविद्यालयों को प्रतिबंधित करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा, क्योंकि दूरस्थ शिक्षा ही समाज के वंचित वर्गों के लिए एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।
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