मुंबई , फरवरी 05 -- सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया है कि मुंधवा भूमि घोटाले में पार्थ पवार को क्लीन चिट दिया जाना असंभव है।
सुश्री दमानिया ने यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी कि यदि खरगे समिति ऐसी कोई रिपोर्ट सौंपती है, तो वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं जिनमें दावा किया गया है कि मामले की जांच के लिए सरकार द्वारा नियुक्त खड़गे समिति ने मुंधवा में 40 एकड़ महार वतन भूमि के सौदे में क्लीन चिट दे दी है। बाजार दरों के अनुसार इस भूमि का मूल्य लगभग 1,800 करोड़ रुपये है, जिसे कथित तौर पर कौड़ियों के दाम पर खरीदा गया था। हालांकि, संबंधित विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये खबरें गलत हैं।
सुश्री दमानिया ने इस बात पर जोर दिया कि पार्थ पवार ने अमेडिया कंपनी के निदेशक के रूप में भूमि लेनदेन करने के लिए शीतल तेजवानी के पक्ष में एक 'पावर ऑफ अटॉर्नी' पर हस्ताक्षर किया था। उन्होंने दावा किया कि दस्तावेज़ के हर पन्ने पर पार्थ पवार के हस्ताक्षर के साथ उनकी तस्वीर और आधिकारिक मुहर मौजूद है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में, कोई भी जांच समिति या जांच एजेंसी पार्थ पवार को क्लीन चिट नहीं दे सकती।
सामाजिक कार्यकर्ता ने ऐसे मामलों की जांच के लिए समितियां नियुक्त करने की प्रणाली की आलोचना करते हुए मांग की कि सरकार ऐसे पैनल बनाना बंद करे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में किसी में भी निष्पक्ष जांच करने और स्पष्ट रिपोर्ट देने का साहस नहीं है।
सुश्री दमानिया ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सुनेत्रा पवार को जल्दबाजी में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाकर भाजपा ने 'एक तीर से दो निशाने' साधे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की आकस्मिक मृत्यु के बाद, सुनेत्रा पवार को मात्र 72 घंटों के भीतर शपथ दिलाई गई, जिससे उनके अनुसार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) स्थायी रूप से दो गुटों में विभाजित हो गई।
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