पुणे , फरवरी 17 -- महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खरगे की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार की कथित मुंडवा भूमि घोटाले में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी।

सूत्रों ने कहा कि रिपोर्ट राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी गई है और जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इसके निष्कर्षों को स्वीकार करने या न करने के संबंध में अंतिम निर्णय के लिए भेजी जाएगी।

यह विवाद पार्थ पवार की कंपनी एमेडिया द्वारा मुंडवा में महार वतन की 40 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से संबंधित है, जिसका उद्देश्य डेटा सेंटर स्थापित करना था। बाजार दर के अनुसार इस भूमि का मूल्य कथित रूप से 1,800 करोड़ रुपये था लेकिन इसे 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया। इसके अलावा, 21 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क के बजाय केवल 500 करोड़ रुपये लिये गये, जिससे राज्य के खजाने को भारी राजस्व हानि होने का आरोप है।

मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने तत्कालीन पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समेत सत्ताधारी दल को निशाना बनाया। जवाब में स्व. अजीत पवार ने लेन-देन रद्द कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने मामले की जांच के लिए श्री खड़गे की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया और जानकारी के अनुसार समिति की रिपोर्ट राजस्व विभाग को सौंप दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्थ पवार, हालांकि कंपनी में एक प्रमुख हिस्सेदार थे, लेकिन इस लेन-देन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। रिपोर्ट में उन कंपनी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है जिन्हें इस सौदे को अंजाम देने का अधिकार था। इसके साथ ही इसमें तहसीलदार और उप-पंजीयक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है जिन्होंने इस लेन-देन में सहयोग दिया था।

इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने पार्थ पवार को क्लीन चिट दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर खरगे समिति ने रिपोर्ट में उन्हें बचाने की कोशिश की तो वे बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख करेंगी। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात पर पैनी नजर है कि मुख्यमंत्री फडणवीस इस रिपोर्ट पर क्या फैसला लेते हैं।

सुश्री दमानिया ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल के कार्यालय से जुड़े रिश्वत मामले में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और राज्य सरकार पर "चयनात्मक आक्रोश" व्यक्त करने पर भी सवाल उठाया है।सुश्री दमानिया ने कहा कि अगर सुश्री सुनेत्रा श्री जिरवाल के कार्यालय में एक क्लर्क द्वारा कथित रूप से रिश्वत लेने से परेशान हैं, तो मुंधवा भूमि घोटाले में उनके बेटे पार्थ पवार के मामले में अपवाद क्यों होना चाहिए।

मुंधवा भूमि घोटाले की जांच के लिए नियुक्त खरगे समिति से पार्थ को क्लीन चिट मिलने के दावों वाली खबरों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सुश्री दमानिया ने सवाल उठाया कि जब समिति की रिपोर्ट अभी तक आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुई है तो ऐसी खबरें कैसे प्रकाशित की जा सकती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी एवं सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में पार्थ को राज्यसभा भेजने की जल्दबाजी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि भूमि घोटाले में उन्हें संलिप्तता से बरी करने वाली रिपोर्टों को उनकी छवि को सुधारने के लिए जानबूझकर प्रसारित किया जा रहा है।

सुश्री दमानिया ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से समिति की रिपोर्ट की पीडीएफ कॉपी की मांग की है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद कई नेताओं ने उनकी पार्टी पर तुरंत नियंत्रण कर लिया। उन्होंने इस संदर्भ में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल का नाम लिया।

सुश्री दमानिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अजीत पवार के विमान हादसे के बाद निजी विमानन कंपनी वीआरएस के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करना चाहिए था। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस की कथित तौर पर कार्रवाई न करने के लिए आलोचना की और सवाल उठाया कि विमान के ब्लैक बॉक्स से जानकारी अभी तक क्यों नहीं प्राप्त की गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्षों पहले डांस बार पर प्रतिबंध लगने के बावजूद, ठाणे, नवी मुंबई और पनवेल में कई डांस बार खुलेआम चल रहे हैं।

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