पुणे , फरवरी 02 -- महाराष्ट्र के दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार और उनके साथी दिग्विजय पाटिल को कथित मुंधवा जमीन घोटा मामले में बड़ी राहत मिली है।

आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खड़क क्राइम ब्रांच ने में 1,886 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया है , जिसमें सिर्फ शीतल तेजवानी को आरोपी बनाया गया है।

जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक आरोपपत्र 28 जनवरी को अदालत में दाखिल किया गया था। जांच में अब तक तेजवानी को मुख्य आरोपी माना गया है, जबकि पार्थ पवार या उनके साथी के शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला है।

इस मामले में सोशल एक्टिविस्ट अंजलि दमानिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या महाराष्ट्र राजनीतिक दलाली का सेंटर बनता जा रहा है और क्या कानून अब सिर्फ आम नागरिकों पर लागू होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रभावशाली लोग जांच से बचते हैं और गरीबों के खिलाफ कानून सख्ती से लागू होता है, तो यह न्याय का मजाक उड़ाने जैसा है।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दमानिया ने कहा कि अगर खड़क क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच पूरी कर ली थी और आरोपपत्र दाखिल कर दिया था, तो उसे यह बताना चाहिए कि सिर्फ शीतल तेजवानी को ही आरोपी क्यों बनाया गया। उन्होंने सवाल किया कि दिग्विजय पाटिल और पार्थ पवार से जुड़ी जांच का क्या हुआ।

यह मामला पुणे के मुंधवा इलाके में एक जमीन के टुकड़े से जुड़ा है, जिसे लाभार्थियों के एक खास वर्ग को दिया गया था। आरोप है कि शीतल तेजवानी ने बाद में पार्थ पवार और उनके सहयोगी से जुड़ी एक कंपनी को रियायती कीमत पर जमीन बेच दी। लेन-देन सामने आने के बाद दमानिया ने इस मुद्दे को सबके सामने उठाया था, जिसके बाद आरोप लगे कि पार्थ पवार ने कम कीमत पर जमीन खरीदी थी और लागू राजस्व शुल्क में छूट हासिल की थी।

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