, March 22 -- गोरखपुर के जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज के अनुसार इसमें महिलाओं की संख्या 10 लाख 88 हजार 364 रही जिन्हें उनके अधिकार बताए गए और शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता के साथ ही आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया जबकि 7 लाख 597 पुरुषों को भी महिला अधिकारों के प्रति अपने दायित्व निभाने के लिए जागरूक किया गया।
उन्होंने बताया कि 'महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन में गेम चेंजर बन रहा ग्रामीण आजीविका मिशन' महिलाओं को जागरूक करने के अलावा उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए भी सरकार ने सतत सजगता दिखाई है। इसमें ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका गेम चेंजर की नजर आती है।
इस बावत उपायुक्त स्वतः रोजगार नीरजा गुप्ता बताती हैं कि ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का जीवन संवारने में मददगार साबित हो रहा है। अकेले गोरखपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 21106 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिसमें करीब तीन लाख महिलाएं आच्छादित हैं। मिशन से जुड़कर और प्रशिक्षण प्राप्त कर गांव की महिलाएं सब्जी उत्पादन, नमकीन उत्पादन, मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन, पशु पालन, कृषि कार्य, मसाला उत्पादन, कृत्रिम आभूषण निर्माण, बैग, ड्रेस, सॉफ्ट टॉयज, फाइल फोल्डर बनाने के साथ पुष्टाहार उत्पादन से जुड़कर आय अर्जित कर अपना जीवन समुन्नत बना रही हैं। गोरखपुर कुल सक्रिय 21106 समूहों में से 629 का गठन वित्तीय वर्ष 2025.26 में हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में 7950 नई सदस्य महिलाओं को जोड़ा गया है।
गोरखपुर जिले में अब तक कुल 18446 समूहों को रिवॉल्विंग फंड निर्गत किया गया है। इनमें इस वित्तीय वर्ष में रिवॉल्विंग फंड पाने वाले 1006 समूह भी सम्मिलित हैं। समूहों को करीब 30 करोड़ रुपये की धनराशि रिवॉल्विंग फंड मद में दी गई है। इसके अलावा समूहों के संचालन के लिए एनआरएलएम के तहत सामुदायिक निवेश निधि ;सीआईएफ. से भी लाभान्वित किया जाता है। गोरखपुर में 15558 समूहों को समुदाय निवेश निधि का लाभ मिला है। समूहों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में बैंकों के कैश क्रेडिट लिंकेज ;सीसीएलद्ध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें बैंक द्वारा 60 हजार रुपये तक की लिमिट जारी की जाती है। प्रथम वर्ष 15 हजार रुपये की लिमिट होती है और सही व नियमित लेनदेन पर दूसरे किस्त में 30 हजार तथा तीसरे किस्त में यह लिमिट बढ़कर 60 हजार रुपये हो जाती है। मूल रूप से इस धनराशि का उपयोग समूह सदस्य आजीविका संवर्धन में करते हैं। गोरखपुर में अब तक 12210 समूहों को सीसीएल जारी हो चुकी है।
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