कोच्चि , फरवरी 09 -- अमृता अस्पताल के डॉक्टरों ने ब्रेन-स्कैन विश्लेषण की एक नयी और पेटेंट तकनीक विकसित की है, जो दवा-प्रतिरोधी मिर्गी (ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी) के मरीजों के मस्तिष्क में दौरे की शुरूआत वाले हिस्सों को पहले से अधिक स्पष्ट और सटीक बनाती है। यह नवाचार मिर्गी उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।

नयी पद्धति मरीज के अपने ही ब्रेन-स्कैन डेटा का विश्लेषण करती है, जिससे डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि दौरा दिमाग के किस हिस्से से शुरू हो रहा है। इस तकनीक को भारत और अमेरिका दोनों देशों में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर पेटेंट प्रदान किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिर्गी सर्जरी की सफलता दर में उल्लेखनीय सुधार होगा।

अधिकांश मिर्गी मरीजों में दवाएं दौरे को नियंत्रित कर लेती हैं, लेकिन लगभग 30 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिनमें सर्वोत्तम दवा-उपचार के बावजूद दौरे जारी रहते हैं। इसे ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी कहा जाता है। यह स्थिति शिक्षा, रोजगार, आत्मनिर्भरता और जीवन-गुणवत्ता को प्रभावित करती है। बच्चों में यह संज्ञानात्मक विकास और गर्भावस्था के परिणामों पर भी असर डाल सकती है।

ऐसे मामलों में, यदि दौरे के स्रोत की सटीक पहचान हो जाए तो सर्जरी मरीज के पूरी तरह दौरा-मुक्त होने का सर्वोत्तम विकल्प बन सकती है।जब एमआरआई स्कैन से दौरे का स्रोत स्पष्ट नहीं होता है तब डॉक्टर एफडीजी-पीईटी स्कैन का सहारा लेते हैं, जो मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों की ऊर्जा खपत को दर्शाता है। आमतौर पर दौरा उत्पन्न करने वाला क्षेत्र इन स्कैन में कम सक्रिय दिखाई देता है। हालांकि, पीईटी छवियों की दृश्य व्याख्या कई बार व्यक्तिपरक होती है और सूक्ष्म असामान्यताएं छूट सकती हैं, खासकर जब एमआरआई सामान्य हो।

इसी चुनौती से निपटने के लिए अमृता अस्पताल के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने 'पेशेंट-स्पेसिफिक' पीईटी विश्लेषण पद्धति विकसित की। स्वस्थ व्यक्तियों के स्कैन से तुलना करने के बजाय-जो महंगा और व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है, यह तकनीक मरीज के मस्तिष्क के बाएं और दाएं हिस्सों की आपसी तुलना करती है।

एमआरआई के साथ सटीक समन्वय (को-रजिस्ट्रेशन) के बाद की गयी यह तुलना दौरे की शुरुआत से जुड़े सूक्ष्म लेकिन चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर उजागर करती है। 'पीएएससीओएम'नामक इस तकनीक की चिकित्सकीय रूप से पुष्टि की गयी है और इसके निष्कर्ष 'जर्नल ऑफ न्यूरोसर्जरी' में प्रकाशित हो चुके हैं। जिन मरीजों की सर्जरी के बाद दौरे पूरी तरह बंद हो गए, उनमें पीएएससीओएम ने पारंपरिक विश्लेषण की तुलना में अधिक सटीक और बेहतर परिणाम दिए।

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