आइजोल , फरवरी 10 -- मिजोरम ने मंगलवार को भारत की जनगणना 2027 के आयोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। राज्य सचिवालय में 'प्रधान जनगणना अधिकारियों' का एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें समय-सीमा, तैयारियों और पूरी तरह से डिजिटल गणना प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सभी जिलों के उपायुक्त और आइजोल नगर निगम के नगर आयुक्त इस सम्मेलन में शामिल हुए, जिन्हें उनके संबंधित अधिकार क्षेत्रों में प्रधान जनगणना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। राज्य में जनगणना कार्य के लिए नोडल विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया।

भारत की जनगणना 2027 के लिए प्रधान सचिव और राज्य नोडल अधिकारी सुधीर कुमार ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए जनगणना के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक बुनियादी राष्ट्रीय कार्य है जो योजना बनाने, नीति निर्धारण और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण का आधार बनता है।

उन्होंने जिला प्रमुखों से जनगणना अधिनियम, 1948 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का कड़ाई से निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनगणना के आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता काफी हद तक जमीनी स्तर पर प्रभावी पर्यवेक्षण पर निर्भर करती है।

यह सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने जिला और स्थानीय स्तर पर सभी जनगणना संबंधी गतिविधियों की बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया कि यह कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर और बिना किसी त्रुटि के पूरा हो।

सम्मेलन के दौरान, मिजोरम जनगणना संचालन निदेशालय के उप निदेशक जमील आर. स्वर ने जनगणना 2027 के लिए समग्र रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रतिभागियों को सूचित किया कि पहला चरण, 'मकान सूचीकरण और आवास गणना' (एचएलओ), पूरे राज्य में 16 अप्रैल से 15 मई, 2026 तक संचालित किया जाएगा। जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक 'स्व-गणना' की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

श्री स्वर ने आवास गणना चरण के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति के बारे में बताया और डाटा संग्रह में डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि जनगणना 2027 भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी जो पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाएगी, जो गणना की पद्धति में एक बड़ा बदलाव है।

इस कार्य के सुचारू संचालन के लिए उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग, शहरी स्थानीय निकायों, वन विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग सहित प्रमुख हितधारक विभागों से सक्रिय सहयोग मांगा।

तकनीकी जानकारी देते हुए जनगणना संचालन निदेशालय के सहायक निदेशक शिवम ने उन डिजिटल मंचों का प्रदर्शन किया जिनका उपयोग जनगणना के दौरान किया जाएगा। इनमें जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल, मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (एचएलबीसी) प्रणाली, मैदानी कर्मचारियों के लिए मोबाइल एप्लिकेशन और प्रगति पर नज़र रखने के लिए एक 'रियल-टाइम' निगरानी डैशबोर्ड शामिल हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव लालरोहलुआ ने राज्य के प्रारंभिक कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। इसमें जनगणना पदाधिकारियों की नियुक्ति, उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का निर्धारण, जिलावार प्रशिक्षण कार्यक्रम और जनगणना के आगामी चरणों के लिए एक रूपरेखा शामिल है।

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