मोहाली , मार्च 09 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने सोमवार को पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में पेश किये गये बजट की कड़ी निंदा की है और इसे पंजाब की आर्थिक तबाही का 'काला दस्तावेज' करार दिया है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में श्री सिद्धू ने कहा कि यह बजट पूरी तरह से भ्रामक है, लुभावनी घोषणाओं से भरा है और पंजाब की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने केवल आंकड़ों के हेरफेर से लोगों को धोखा देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पंजाब पर लाखों करोड़ रुपये का भारी कर्ज कम करने के लिए कोई ठोस नीति तैयार करने के बजाय, सरकार ने राज्य के कर्ज को अगले साल 31 मार्च तक 4.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की नींव रख दी है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों, कर चोरी और भ्रष्टाचार के कारण राज्य का राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नतीजतन, राज्य की कुल आय का 91 प्रतिशत वेतन, पेंशन और कर्ज की किस्तों व ब्याज के भुगतान में खर्च हो रहा है। उन्होंने जोड़ा कि अगले साल तक पंजाब के कुल कर्ज का कुल आय से अनुपात 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा और 2031 तक यह 60 प्रतिशत हो सकता है, जो आर्थिक पतन का स्पष्ट संकेत है।

सरकार पर बरसते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि पंजाब की रीढ़ माने जाने वाले किसान और मजदूर इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किये गये हैं। कृषि संकट के कारण होने वाली किसान आत्महत्याओं को रोकने या प्रभावित परिवारों की मदद के लिए किसी विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि जो सरकार कभी कर्ज माफी के बड़े-बड़े दावे करती थी, वह अब किसानों के मुद्दों को सुलझाने से भाग रही है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद सरकार एक कृषि नीति तक तैयार करने में विफल रही है।

श्री सिद्धू ने कहा कि यह बजट सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बेहद निराशाजनक है। जिस सरकार ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दिखावा किया था, उसने बजट में इसके लिए कोई धन आवंटित नहीं किया है, जिससे कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जोड़ा कि महंगाई भत्ते की पांच लंबित किस्तों पर भी बजट में सरकार की चुप्पी बनी हुई है, जिससे राज्य के कर्मचारियों में भारी रोष है, जिन्हें पहले से ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में 18 प्रतिशत कम डीए मिल रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने और विकास के लिए कोई विशेष बजट आवंटित नहीं किया है, जो राज्य की मातृभाषा के साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक दस्तावेज है और इसका आम लोगों के विकास से कोई वास्तविक लेना-देना नहीं है।

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