शिमला , नवंबर 11 -- प्रख्यात समाज सेवी और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के साथी मंगत राम चौहान (97) का शिमला जिले के कोटखाई स्थित उनके पैतृक गांव डोमेहर में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
विज्ञान और मानवता के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए श्री चौहान की इच्छानुसार उनका पार्थिव शरीर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला को दान कर दिया गया।
श्री चौहान मैट्रिक पास थे और वह अपनी दूरदर्शी सोच तथा तर्कवादी आदर्शों के लिए जाने जाते थे। कैरी पंचायत के दस वर्षों तक प्रधान के रूप में उन्होंने कई कल्याणकारी और विकास परियोजनाओं को लागू किया।
उन्होंने गरीब परिवारों को भूमि आवंटित की और 60 बीघा का सामुदायिक उद्यान लगाया जिससे आज पंचायत को सालाना लगभग 30 लाख रुपये की आय होती है। उनके नेतृत्व में किये गये सुधारों से कैरी पंचायत को एशिया की सर्वश्रेष्ठ पंचायत घोषित किया गया है।
श्री चौहान ने पचास वर्ष की आयु में अपनी निजी संपत्ति अपने बच्चों के नाम कर दी और गरीब तथा अनाथ बच्चों की शिक्षा और देखभाल के लिए गिरि ज्ञान विद्या ज्योति ट्रस्ट की स्थापना की। इस ट्रस्ट के माध्यम से 50 से अधिक छात्रों को आवासीय शिक्षा और कॉलेज स्तर की सहायता का लाभ मिला जिनमें से कई अब सरकारी और पेशेवर क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
श्री चौहान को उनकी उत्कृष्ट समाज सेवा के लिए राज्य सरकार ने हिमाचल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था। डॉ. वाई.एस. परमार, ठाकुर रामलाल, वीरभद्र सिंह और पूर्व डीजीपी रति राम वर्मा सहित कई प्रमुख नेताओं के साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे।
वर्ष 2014 में किये गये उनके संकल्प के अनुसार उनके परिवार ने 10 नवंबर को उनका पार्थिव शरीर आईजीएमसी को सौंप दिया। श्री चौहान ने अपनी मृत्यु से पहले परिजनों को कह दिया था कि वह मृत्यु के बाद उनके लिये कोई भी संस्कार नहीं करें।
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