जौनपुर , मार्च 28 -- आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलपति प्रो. योगेश उपाध्याय ने कहा कि मानव से लेकर मशीन तक बदलती दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नई प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनकर उभर रही है, जो भविष्य में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करेगी।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में शनिवार को "कॉरपोरेट प्रणाली में उभरते मुद्दे एवं चुनौतियां" विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने यह बात कही। संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लेकर समकालीन विषयों पर अपने विचार साझा किए।
प्रो. उपाध्याय ने कहा कि आज विश्व भारतीय प्रतिभा का सम्मान कर रहा है, लेकिन एआई के बढ़ते प्रभाव ने नई चुनौतियां भी पैदा की हैं। उन्होंने कहा कि पहले मानव श्रम की आवश्यकता के चलते लोगों को विभिन्न देशों में भेजा गया, फिर मशीनों ने श्रम का स्थान लिया और अब बुद्धिमत्ता के स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। यह प्रतिस्पर्धा केवल मनुष्य और मशीन के बीच नहीं, बल्कि एक नई "प्रजाति" के उभरने का संकेत है।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई के माध्यम से व्यक्तिगत स्तर पर रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिला है, जिससे कम समय में नए विचार उत्पन्न हो रहे हैं। हालांकि, समूह स्तर पर इसके उपयोग से कार्यों में एकरूपता बढ़ने के कारण मौलिकता और विविधता प्रभावित होने की आशंका भी है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बदलते कार्यबल की चुनौतियों से भरा है, जो नवाचार और उत्तरदायी नेतृत्व के नए अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने संगठनात्मक उत्कृष्टता के लिए विभिन्न प्रबंधन क्षेत्रों के समन्वय पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेई ने कहा कि भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर अच्छा कार्य कर रहा है, लेकिन विश्वसनीयता में कमी चिंता का विषय है। उन्होंने नैतिकता और सकारात्मक नेतृत्व को आवश्यक बताया।
पूर्व डीन, अन्नामलाई विश्वविद्यालय चेन्नई के प्रो. एस. रामनाथन ने कहा कि लाभ ही व्यवसाय का एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कॉरपोरेट फाइनेंस, व्यावसायिक अर्थशास्त्र और नीतियों में सरकार और व्यवसाय के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
प्लेनरी व्याख्यान में आईआईआईटी प्रयागराज के प्रो. रंजीत सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वयं ज्ञानी नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह मानव द्वारा दिए गए डेटा पर आधारित होती है। संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन संयोजक प्रो. अविनाश डी. पाथर्डीकर ने किया, जबकि संचालन आयोजन सचिव डॉ. आशुतोष के. सिंह ने किया।
इस अवसर पर पूर्व कुलपति प्रो. पीसी पतंजलि सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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