प्रयागराज , जनवरी 22 -- प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित अभद्रता का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग की दहलीज पर पहुंच गया है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता डॉक्टर गजेंद्र सिंह यादव ने राज्य मानवाधिकार आयोग में मामले की शिकायत करते हुए आयोग से दखल देने की मांग की है। शिकायत में त्रिवेणी संगम जाने से रोके जाने की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच और उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि समाचार माध्यमों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शंकराचार्य जी के धार्मिक काफिले को त्रिवेणी संगम की ओर जाने से रोका गया,उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से मारपीट एवं धक्का-मुक्की की गई, जिससे तनावपूर्ण एवं अव्यवस्थित स्थिति उत्पन्न हुई। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अन्य संत-समुदायों एवं अखाड़ों को धार्मिक अनुष्ठान एवं पवित्र स्नान की अनुमति प्राप्त होने की बातें भी प्रकाश में आईं। डॉ. यादव द्वारा की गई शिकायत में कहा गया है कि यदि भीड़-नियंत्रण अथवा सुरक्षा कारणों से कोई प्रतिबंध आवश्यक था, तो वह समान, तर्कसंगत एवं आनुपातिक होना चाहिए था। चयनात्मक रोक, अपमानजनक व्यवहार अथवा वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में किया गया प्रशासनिक हस्तक्षेप संविधान प्रदत्त समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14), धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) तथा गरिमा के साथ जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करते हुए मानवाधिकार हनन की श्रेणी में आ सकता है।
मानवाधिकार आयोग से मांग की गई है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए। मेला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया, आदेश एवं बल-प्रयोग (यदि कोई हो) की समीक्षा की जाए,मानवाधिकार उल्लंघन पाए जाने पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की जाए, भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों में संत-समुदाय एवं श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा के लिये स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
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