कटक , जनवरी 26 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को राज्य की जनता से लोकतंत्र को मजबूत करने तथा एक समृद्ध एवं विकसित राज्य का निर्माण करने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बाराबती स्टेडियम में तिरंगा फहराने के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ओडिशा की वास्तविक संपत्ति जनता की सामूहिक शक्ति, साहस एवं प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा, "आप हमारे राज्य की शक्ति, साहस और समृद्धि हैं। आइए, कंधे से कंधा मिलाकर एक साथ आगे बढ़ें।"तीव्र औद्योगीकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा के लिए अन्य राज्यों के साथ कदम मिलाकर चलना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि उद्योग राज्य की समृद्धि के स्तंभ होंगे क्योंकि सरकार सहयोग और जनभागीदारी के माध्यम से औद्योगिक विकास में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य अगले 10 वर्षों में एक समृद्ध ओडिशा का निर्माण करना है। जब हम 2036 में ओडिशा की स्थापना की शताब्दी मनाएंगे, तब ओडिशा देश के शीर्ष पांच राज्यों में अपना स्थान सुरक्षित कर लेगा।"इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए श्री मांझी ने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक नागरिक, क्षेत्र और जिले को समृद्ध होना चाहिए और कहा कि समग्र प्रगति प्राप्त करने के लिए संतुलित विकास महत्वपूर्ण है।
तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हम इस गति के साथ तालमेल नहीं बिठाएंगे तो हम पिछड़ जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि राज्य विकास के शिखर तक पहुंचने के लिए नए तकनीकी ज्ञान और कौशल को अपना रहा है।
श्री माझी ने आगे कहा कि सरकार का विकास मॉडल विशेष रूप से प्रधानमंत्री द्वारा उजागर किए गए चार वर्गों गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री ने महान राष्ट्रीय नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, वीर सावरकर, बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी शामिल हैं, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।
स्वतंत्रता आंदोलन और ओडिशा राज्य के गठन में योगदान को याद करते हुए श्री माझी ने वीर सुरेंद्र साई, शहीद माधो सिंह, बक्सी जगबंधु, उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास, उत्कल गौरव मधुसूदन दास, गोपबंधु चौधरी, नबकृष्ण चौधरी, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद लक्ष्मण नायक, मां रमा देवी, शहीद बाजी राउत, मालती चौधरी, मां पारबती गिरि और डॉ हरेकृष्ण महताब जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने उन लाखों गुमनाम क्रांतिकारियों और सैनिकों को भी सम्मानित किया जिन्होंने राष्ट्र की एकता, सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई विश्लेषकों और इतिहासकारों का मानना है कि स्वतंत्रता के बाद पहले साढ़े छह दशकों में भारत वांछित विकास नहीं हो सका। 1980 के दशक तक, भारत की आर्थिक वृद्धि इतनी धीमी थी कि पश्चिमी अर्थशास्त्रियों ने उपहासपूर्वक इसे हिंदू विकास दर कहा था।
श्री माझी ने कहा कि हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद एक निर्णायक बदलाव आया क्योंकि देश ने विकास के एक नए पथ पर कदम रखा। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने मेक इन इंडिया जैसी प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत कई नए क्षेत्रों में वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर जहाज तक, देश ने विनिर्माण के सभी स्तरों पर सफलता प्राप्त करना शुरू कर दिया है और पिछले दशक को भारत के लिए अभूतपूर्व परिवर्तन का दौर देखा है।
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