वाराणसी , जनवरी 31 -- इस बार माघी पूर्णिमा के दिन दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक साथ सात शुभ योग और पुष्य नक्षत्र की युति में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा सकेंगे। सूर्य और चंद्रमा के विशेष योग के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग अत्यंत फलदायी होगा। यह योग 1 फरवरी की भोर से 2 फरवरी की भोर तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को अत्यंत प्रिय मानी जाती है।
बटुक भैरव मंदिर के महंत एवं वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य जितेंद्र मोहन पूरी ने बताया कि माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी को प्रातः 5.19 बजे से अगले दिन 2 फरवरी को प्रातः 3.46 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा का स्नान इसलिए 1 फरवरी को अत्यंत फलदायी होगा। इस दिन विशेष प्रीति योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, रवि आयुष्मान योग, श्रीवत्स योग और उत्तम योग बनेंगे।
1 फरवरी को काशी के गंगा घाटों अथवा प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अनन्य फल की प्राप्ति तथा पापों का नाश होता है। इस दिन वस्त्र, अनाज, फल आदि का दान करना चाहिए। माघ पूर्णिमा स्नान के लिए तीन विशेष मुहूर्त बन रहे हैं।
ब्रह्म मुहूर्त - 1 फरवरी को प्रातः 5.24 बजे से 6.18 बजे तक, रवि पुष्य योग - प्रातः 7.09 बजे से रात्रि 11.58 बजे तक और मीन लग्न मुहूर्त - प्रातः 8.46 बजे से 10.15 बजे तक रहेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित