वाराणसी , फरवरी 1 -- माघी पूर्णिमा और संत रविदास जी की जयंती के अवसर पर धार्मिक नगरी काशी में लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। प्रयागराज में स्नान के बाद पलट प्रवाह अब काशी की ओर बढ़ रहा है। अनुमान है कि पांच से छह लाख तक श्रद्धालु काशी पहुंचेंगे।

काशी के गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान का सिलसिला जारी है। दशाश्वमेध, अस्सी, राजेंद्र प्रसाद, दरभंगा, शिवाला, राणा महल, अहिल्याबाई, रविदास, नमो, राजघाट सहित अन्य सभी प्रमुख घाटों पर भक्त डुबकी लगा रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम में भी भक्तों की भारी भीड़ जुटी हुई है। मैदागिन से गोदौलिया, अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट की ओर किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। भीड़ को देखते हुए बाबा विश्वनाथ के झांकी दर्शन की व्यवस्था की गई है। साथ ही गंगा में छोटी नावों का संचालन भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि भारतीय सनातन परंपरा में माघी पूर्णिमा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं पुण्यदायक पर्व है। यह पर्व माघ मास के पुण्य काल में मनाया जाता है, जिसे शास्त्रों में 'माघमासो महापुण्यप्रदायकः' कहकर विशेष महिमा दी गई है।

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि माघी पूर्णिमा न केवल गंगा-स्नान, दान, जप, तप और व्रत का विशिष्ट अवसर है, बल्कि यह पर्व भारतीय लोकजीवन में करुणा, दया, सेवा और समत्व की भावना को मजबूत करता है। इस दिन संगमों, तीर्थों और पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने से आत्मिक शुद्धि के साथ लोक-कल्याण का भाव जागृत होता है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार माघी पूर्णिमा पर किया गया स्नान-दान सहस्रगुणित फल प्रदान करता है। विशेष रूप से अन्नदान, वस्त्रदान, तिलदान, घृतदान और स्वर्णदान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। यह पर्व साधना, संयम और आत्मानुशासन की परंपरा को पुष्ट करता है। शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्यकर्म जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-चारों पुरुषार्थों की सिद्धि में सहायक होते हैं।

संत रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर स्थित शिरोमणि संत रविदास मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भारी भीड़ जुटी है। रैदासियों द्वारा भजन-कीर्तन और पाठ का सिलसिला जारी है। अरदास एवं गुरु बंदगी की जा रही है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई, बिहार, झारखंड सहित देश के कोने-कोने से तथा अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, जापान जैसे कई देशों से प्रवासी भारतीय भी पहुंचे हैं।

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