रायपुर , नवंबर 01 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ समेत देश के हर कोने से 'माओवादी आतंकवाद' को जल्दी समाप्त करने का भरोसा देते हुए शनिवार को कहा कि पहले की सरकारों ने माओवादी हिंसा से पीड़ित आदिवासी समाज को उनके हाल पर छोड़ दिया था।
श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के 25वें वर्ष पर राज्य को 14,260 करोड़ रुपये से अधिक की विकास और अधोसंरचना परियोजनाओं की सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने नये विधानसभा भवन और देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण किया।
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के एक दिन के दौरे में नवा रायपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ माओवादी हिंसा के कारण दशकों तक सड़कों और विकास की अन्य परियोजनाओं से वंचित रहा। उन्होंने कहा, " लेकिन मैं देशवासियों को गारंटी देता हूं, वह दिन दूर नहीं, जब हमारा छत्तीसगढ़, हमारा हिन्दुस्तान, इस हिन्दुस्तान का हर कोना माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।"प्रधानमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़, नक्सलवाद-माओवादी आतंक की बेड़ियों से मुक्त हो रहा है। नक्सलवाद की वजह से आपने 50-55 साल तक जो कुछ झेला, वह पीड़ादायक है। उन्होंने कांग्रेस के नेताओं का नाम लिए बगैर उन पर हमला करते हुए कहा, " आज जो लोग संविधान की किताब का दिखावा करते हैं, जो लोग सामाजिक न्याय के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाते हैं, उन्होंने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आपके साथ दशकों तक अन्याय किया है।"श्री मोदी ने कहा, " माओवादी-आतंक के कारण, लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाके सड़कों से वंचित रहे। बच्चों को स्कूल नहीं मिले, बीमारों को अस्पताल नहीं मिले और जो जहां थे, बम से उसे उड़ा दिया जाता था। डॉक्टरों को, टीचरों को मार दिया जाता था और दशकों तक देश पर शासन करने वाले, आप लोगों को अपने हाल पर छोड़कर, वे लोग एयर कंडीशन कमरों में बैठकर अपने जीवन का आनंद लेते रहे।"उन्होंने कहा, " मोदी अपने आदिवासी भाई-बहनों को हिंसा के इस खेल में बर्बाद होने के लिए नहीं छोड़ सकता था। मैं लाखों माताओं-बहनों को अपने बच्चों के लिए रोते-बिलखते नहीं छोड़ सकता था।"उन्होंने कहा कि इसलिए उनकी सरकार ने 2014 में भारत को माओवादी आतंक से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। उसके बाद 11 साल में सवा सौ जिलों में फैला माओवादी आतंक सिर्फ तीन जिलों में थोड़ा बहुत शेष बचे हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय बस तीन जिलों में माओवादी आतंक का थोड़ा मोड़ा रुबाब चलाने की कोशिश हो रही है, लेकिन वह दिन दूर नहीं, जब छत्तीसगढ़ समेत देश का हर कोना माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त हो जायेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, " छत्तीसगढ़ के जो साथी, हिंसा के रास्ते पर निकल पड़े थे, वे अब तेजी से हथियार डाल रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कांकेर में कुछ दिन पहले बीस से अधिक नक्सलियों और इससे पहले 17 अक्टूबर को बस्तर में 200 से अधिक नक्सलियों के समआत्मसमर्पण का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, " बीते कुछ महीनों में ही देशभर में माओवादी आतंक से जुड़े दर्जनों लोगों ने हथियार डाल दिये हैं। इनमें से बहुतों पर लाखों-करोड़ों रुपयों का इनाम हुआ करता था। अब इन्होंने बंदूकें छोड़ करके, हथियार छोड़ करके देश के संविधान को स्वीकार कर लिया है।"प्रधानमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा से उबर कर निकले इलाकों में अब विकास की किरण पहुंच रही है और हालात बदल रहे हैं। बीजापुर के चिलकापल्ली गांव में सात दशकों के बाद पहली बार बिजली पहुंची। अबूझमाड़ के रेकावया गांव में आजादी के बाद पहली बार स्कूल बनाने का काम शुरू हुआ है। पूवर्ती गांव, जो कभी आतंक का गढ़ कहा जाता था, आज वहां विकास के कामों की बयार बह रही है। अब लाल झंडे की तिरंगा शान से लहरा रहा है। आज बस्तर जैसे क्षेत्रों में डर नहीं, उत्सव का माहौल है। वहां बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन हो रहे हैं।
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