चंड़ीगढ़ , अप्रैल 17 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला आरक्षण के मुद्दे पर बार-बार अपना रुख बदल रही है और महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने संसद में विधेयक पर बोलते हुए कहा कि शिअद इसका समर्थन करता है, लेकिन असंवैधानिक तरीके से कराए जा रहे परिसीमन का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार जनगणना के बाद ही परिसीमन किया जा सकता है और इसे इस तरह किया जाना चाहिए कि सभी राज्यों को लोकसभा में समान और अनुपातिक प्रतिनिधित्व मिल सके।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए मौखिक आश्वासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को इस संबंध में लिखित गारंटी देनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 1986 में चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने, 'बंदी सिंहों' की रिहाई और हाल ही में वेयरहाउसिंग अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच के आश्वासन भी पूरे नहीं किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में विशेष सत्र बुलाया, लेकिन 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू नहीं किया और इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया। अब बिना जनगणना के संशोधित विधेयक लाया जा रहा है, जिससे स्पष्ट है कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन किया जा रहा है।

श्रीमती कौर ने आरोप लगाया कि संसद में बहुमत के दम पर विधेयक को "बुलडोज़" किया जा रहा है और पिछले तीन वर्षों में जनगणना न कराना भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि विधेयक में स्पष्ट किया जाए कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का आधार क्या है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ चुनावों से पहले याद किया जाता है और 'नारी शक्ति' के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। उन्होंने एक पारदर्शी कानून बनाने की मांग की, जिससे महिलाओं को वास्तविक अधिकार मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक 2014 और 2019 के भाजपा घोषणापत्र का हिस्सा था, लेकिन 2024 चुनावों से ठीक पहले ही इसे लाया गया।

श्रीमती कौर ने बाद में संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में केंद्र और पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप ने सभी फसलों पर एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन अब मंडियों में पिछले 15 दिनों से आ रही गेहूं की फसल की खरीद तक नहीं हो रही है, जिससे किसान परेशान हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राज्य सरकार पिछले साल आई बाढ़ से धान की फसल को हुए नुकसान और हाल ही में बारिश व ओलावृष्टि से हुई तबाही के लिए भी किसानों को मुआवजा देने में विफल रही है।

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