नयी दिल्ली , अप्रैल 16 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि यह भ्रांति निराधार है कि महिलाओं को विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी विधेयकों को पारित करने से दक्षिण के राज्यों का सदन में प्रतिनिधित्व कम होगा।
श्री शाह ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में एक साथ हो रही चर्चा के दौरान कहा कि एक बड़ा आख्यान गढ़ा जा रहा है कि इन विधेयकों के माध्यम से दक्षिण के राज्यों की लोकसभा में क्षमता कम हो जायेगी, उनका बड़ा नुकसान होगा। वह स्पष्ट कर रहे हैं कि दक्षिण के किसी राज्य काे लोकसभा की सीटों के लिहाज से कोई नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जो सदस्य सदन के समक्ष कुछ राज्यों की सीटें कम होने की भ्रांति फैला रहे हैं, तो वह भारत के गृह मंत्री के रूप में यहां कह रहे हैं कि सीटों के लिहाज से किसी राज्य का कोई नुकसान नहीं होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने से कर्नाटक की मौजूदा 28 सीटें बढ़कर 42 हो जाएंगी और कुल सीटों में राज्य की सीटों का प्रतिशत भी मौजूदा 5.15 प्रतिशत के समान 5.14 प्रतिशत रहेगा। आंध्रप्रदेश की सीटें 25 से बढ़कर 38 हो जाएंगी और कुल सीटों में राज्य की सीटों की हिस्सेदारी 4.60 से बढ़कर 4.65 प्रतिशत हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना की सीटों की संख्या 17 से बढ़कर 26 और सीटों का प्रतिशत 3.13 से बढ़कर 3.18 प्रतिशत हो जाएगा। वह तमिलनाडु की जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनकी शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ रही है। तमिलनाडु की मौजूदा सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी और कुल सीटों में राज्य की सीटों का प्रतिशत भी 7.18 से बढ़कर 7.23 प्रतिशत हो जाएगा। केरलम की 20 सीटों की संख्या बढ़कर 30 हो जाएगी और राज्य की सीटों का प्रतिशत मौजूदा 3.68 के लगभग समान 3.67 प्रतिशत रहेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि परिसीमन विधेयक 2026 से दक्षिण के राज्यों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा। उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत वृद्धि मॉडल के बाद लोक सभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या 816 हो जाने से दक्षिण के सभी राज्यों की सीटों की संख्या बढ़ जाएगी। गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा में दक्षिण के राज्यों की मौजूद 129 सीटों की संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी और सदन की कुल सीटों में दक्षिण के राज्यों की सीटों का प्रतिशत भी मौजूदा लगभग 24 प्रतिशत के समान रहेगा।
गृह मंत्री ने कहा कहा कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश की 25 सीटें हैं और 543 सदस्यों वाले सदन में उसका प्रतिनिधित्व लगभग 4.60 प्रतिशत है। प्रस्तावित परिवर्तन के बाद लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ सीटों की संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी और आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व बढ़कर लगभग 4.65 प्रतिशत हो जाएगा। तेलंगाना में वर्तमान में 17 सीटें हैं और मौजूदा लोक सभा में उसका प्रतिनिधित्व लगभग 3.13 प्रतिशत है। प्रस्तावित वृद्धि के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 26 हो जाएगी और प्रतिनिधित्व लगभग 3.18 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभी लोकसभा की 543 सीटें हैं और उनमें 129 सीटें दक्षिण के राज्यों की हैं, जो बढ़कर 195 हो जायेंगी।
श्री शाह ने कहा कि यह भी भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार जाति जनगणना कराना नहीं चाहती। वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय कर लिया है। मंत्रिमंडल ने निर्णय किया है कि अगली जनगणना में जाति गणना करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि पहले सभी मकानों की गणना की जा रही है, जब व्यक्तियों की गणना की जायेगी, तो उनकी जातियों की गणना की जायेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2029 से पहले जो भी चुनाव होंगे, वे सीटों की पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही कराये जायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी ताकत देश से लोकतंत्र को समाप्त नहीं कर सकती। उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव का नाम लेते हुए कहा कि वह चिंता न करें, उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव अगले वर्ष वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही होंगे।
श्री शाह ने कहा कि देश में लोकतंत्र समाप्त करने जैसी बातें भी की जा रही हैं, वह कहना चाहते हैं कि लोकतंत्र कभी समाप्त नहीं होगा। देश में आपातकाल लगाकर भी लोकतंत्र को समाप्त करने का जिन्होंने प्रयास किया था, जनता ने चुनावों में उन्हें ही समाप्त कर दिया।
श्री शाह ने कहा कि सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि पूर्ववर्ती प्रावधानों को ही यथावत रखा है। उन्होंने कहा कि यदि अतीत में इस अधिनियम का उपयोग किसी प्रकार के हेरफेर के लिए किया गया होगा, तो उस पर वे टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन वर्तमान सरकार ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया है।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट तभी लागू होगी, जब संसद उसे अनुमोदित करेगी और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होगी। इसलिए यह प्रक्रिया 2029 से पहले लागू होने का प्रश्न ही नहीं उठता। वर्ष 2029 तक होने वाले सभी चुनाव वर्तमान व्यवस्था और मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही संपन्न होंगे।
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