चंडीगढ़ , मार्च 10 -- शिरोमणि अकाली दल विधायक गनीव कौर मजीठिया ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान की महिलाओं के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।
उन्होंने पंजाब राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग से इस मामले में कार्रवाई की मांग की।
श्रीमती मजीठिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी की महिला विधायक और अन्य सदस्य, जो महिलाओं की गरिमा एवं सम्मान के लिए खड़े होने का दावा करते हैं, उन्हें पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे मुख्यमंत्री के भाषणों में महिलाओं को "भाभी" और "पीली ततैया" कहकर संबोधित करने वाली भाषा की निंदा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने बार-बार महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सदन में कोई भी इन टिप्पणियों की खुलकर आलोचना करेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग महिलाओं की गरिमा की बात करते हैं, उन्हें अपने स्वयं के नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराना चाहिए।
उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हालिया विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन के दौरान किए गए व्यवहार पर सरकार से सवाल किया और पूछा कि जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया गया, क्या उसे महिलाओं का सम्मान कहा जा सकता है?कार्यवाही के दौरान जब अध्यक्ष ने श्रीमती मजीठिया का नाम पुकारा और उन्हें बोलने की अनुमति दी, तो सत्तापक्ष की बेंचों पर बैठे कुछ सदस्य कथित तौर पर हंसने लगे। इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि अध्यक्ष ने उन्हें बोलने का अवसर दिया है, तो आप विधायकों के लिए हंसने का कोई कारण नहीं बनता। उन्होंने पूछा कि क्या विधानसभा के अंदर महिलाओं का सम्मान इसी तरह किया जाता है। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब आप की कई महिला विधायक अपनी सीटों से खड़ी हो गईं और श्रीमती मजीठिया से बहस करने लगीं। व्यवधानों के बावजूद, उन्होंने सत्तापक्ष की बेंचों से की गई टिप्पणियों का जवाब देना जारी रखा। अकाली दल के नेताओं के अनुसार, इस दौरान उनका माइक बंद कर दिया गया था।
चर्चा के दौरान श्रीमती मजीठिया ने एक वायरल वीडियो का भी जिक्र किया जिसमें मुख्यमंत्री को "भाभी" के बारे में टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने विधानसभा में इस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसके बाद सदन में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया।
बाद में श्रीमती मजीठिया ने यह भी मांग की कि पंजाब राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग को मुख्यमंत्री भगवंत मान के वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीडियो में मुख्यमंत्री को संवैधानिक पद पर रहते हुए महिलाओं के बारे में टिप्पणी करते हुए दिखाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का संविधान महिलाओं को गरिमा और अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने मांग की कि संबंधित आयोगों को मामले का संज्ञान लेने के बाद मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए।
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