दरभंगा, मार्च 14 -- बिहार के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में मानविकी संकाय की अध्यक्ष प्रो. पुनीता झा ने कहा कि महिला शिक्षा, समानता, सहभागिता एवं सशक्तिकरण के बदौलत ही विकसित भारत-2047 का सपना साकार होगा।
विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में "विकसित भारत-2047 और महिला शक्ति" विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर झा ने कहा कि सतत एवं संतुलित विकास के साथ विकसित भारत-2047 की परिकल्पना साकार करने में महिलाओं की भूमिका अहम होगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील एवं जिम्मेदार होती हैं, जो सतत प्रयत्नशील रहती हैं और काम से कभी रिटायर भी नहीं होती हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत का तेजी से समग्र विकास हो रहा है, जिनमें महिलाओं का भी काफी योगदान है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. राफिया काजिम ने महिलाओं को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि वह शक्ति की प्रतीक हैं, जिनके आत्मविश्वासी एवं जागृत होने पर देश विकसित एवं खुशहाल होगा। उन्होंने कहा कि अनेक महिलाएं विद्वान्, वैज्ञानिक, दार्शनिक, प्रशासिका, समाजसेवी, राजनीतिक एवं धनवान हमारे समाज में रही हैं जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं।
डॉ.आर एन चौरसिया ने कहा कि महिला और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं, जिनमें अन्योन्याश्रय संबंध है। मां, बहन, बेटी एवं पत्नी के रूप में उनके योगदान को कभी बुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने 21वीं शताब्दी को महिलाओं की शताब्दी बताते हुए कहा कि यद्यपि महिलाओं की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है, लेकिन पितृसत्तात्मक समाज में उंनके लिए अभी और अधिक काम करने की जरूरत है। उन्होने कहा कि महिलाएं विकसित भारत- 2047 की सिर्फ साक्षी नहीं, बल्कि सारथी भी बन रही हैं।
डॉ. नैयर आज़म ने महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ये संस्कार, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को नई पीढ़ियों में हस्तांतरित करती हैं। हमारा मूल लक्ष्य समानता होना चाहिए।
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