पणजी , अप्रैल 10 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि विधायी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी से शासन में अधिक संवेदनशीलता आएगी जिससे नीति-निर्माण अधिक जन-केंद्रित होगा।
श्री बिरला ने कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (सीपीए) इंडिया रीजन, जोन-सप्तम के प्रथम सम्मेलन के समापन समारोह में कहा कि विधायी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को और अधिकबढ़ाने की आवश्यकता। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएँ व्यापार, शिक्षा और विज्ञान सहित विभिन्नक्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, और नीति-निर्माण एवं कानून-निर्माण में उनका प्रतिनिधित्व उनकी उपलब्धियों केअनुरूप बढ़ना चाहिए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की अधिक भागीदारी से शासन में अधिक संवेदनशीलता आएगी, जिससे नीति-निर्माण अधिक जन-केंद्रित होगा और समाज की आवश्यकताओं के अधिक अनुरूप बनेगा।उन्होंने कहा कि महिलाएँ पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभा रही हैं और शासन एवं विकास में एक नवीन एवं रचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर रही हैं।
उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सार्वजनिक संवाद को सशक्त बनाने में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री बिरला ने कहा कि ये प्रगति लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को बढ़ा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ती जन-भागीदारी से नीति-निर्माण अधिक सार्थक और प्रभावी होता है। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रौद्योगिकी का उपयोग युवाओं के बहुमूल्य समय की बर्बादी के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे उनके कौशल और क्षमताओं को बढ़ाने के साधन के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए।
प्लेनरी सत्रों में हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि सीपीए जोन-सप्तम के तीन राज्यों-महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के टीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने बताया कि इन राज्यों ने चुनौतियों को अवसरों में बदलने के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। नीर क्रांति जैसी पहलों के साथ-साथ रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों को पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि गोवा अपनी मजबूत आतिथ्य परंपरा के कारण विश्व के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र भी पर्यटन क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे हैं।
श्री बिरला ने कहा कि सम्मेलन में युवा विधायकों ने विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि तीन राज्यों के विधायकों के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और हरियाणा के पीठासीन अधिकारियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अनुभव, युवा शक्ति और नवाचार को मिलाकर प्रतिभागियों ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
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