वाराणसी , अप्रैल 21 -- कांग्रेस की राष्ट्रीय संगठन सचिव नेटा डिसूजा ने मंगलवार को काशी आगमन पर केंद्र सरकार की महिला आरक्षण नीति और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है, तो उन्हें अधिकार अब तक क्यों नहीं मिला।
मैदागिन स्थित पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्रीमती डिसूजा ने कहा, "मैं काशी की इस पवित्र धरती से, मां गंगा की साक्षी में, देश की महिलाओं की आवाज उठाने आई हूं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम पर जो सच्चाई छिपाई गई, आज हम उसे सामने रख रहे हैं। महिलाओं को अधिकार देने का वादा किया गया, लेकिन बदले में उन्हें केवल इंतजार और भ्रम मिला है।"उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक की समयरेखा का उल्लेख करते हुए कहा कि 19 सितंबर 2023 को यह विधेयक लोकसभा में पेश हुआ, 20 सितंबर को लोकसभा में बहुमत से पारित हुआ, 21 सितंबर को राज्यसभा से सर्वसम्मति से मंजूरी मिली और 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।
नेटा डिसूजा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी अब तक इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि यह ऐतिहासिक निर्णय था, तो इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ दिया गया है। उनके अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने तथा जनगणना एवं परिसीमन को शर्त बनाने का उद्देश्य राजनीतिक गणित साधना है।
कांग्रेस का पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में पहल की थी और 2023 में भी पार्टी ने विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए तथा इसमें सामाजिक न्याय का समुचित ध्यान रखा जाए। उन्होंने प्रश्न उठाया कि महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा, जब समाज के हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर प्राप्त होंगे।
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