नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं के नेतृत्व में विकास और बाल कल्याण के बारे में प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए 5 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है जो पिछले वित्त वर्ष 4.49 लाख करोड़ की तुलना में 11.36 प्रतिशत की वृद्धि है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में लैंगिक संवेदनशील बजटिंग को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। कुल केंद्रीय बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 के 8.86 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 9.37 प्रतिशत हो गई है, जो लैंगिक-संवेदनशील शासन के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह बढ़ोतरी विभिन्न क्षेत्रों में लैंगिक दृष्टिकोण को मुख्यधारा में लाने तथा यह सुनिश्चित करने पर सरकार के निरंतर फोकस को दर्शाती है कि सार्वजनिक व्यय से महिलाओं और बालिकाओं के लिए स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और देखभाल सेवाओं के क्षेत्रों में दीर्घकालिक परिणाम मिलें।

बजट की एक प्रमुख विशेषता मज़बूत देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर दिया गया ज़ोर है जिसमें देखभाल कार्य को न केवल एक सामाजिक आवश्यकता बल्कि रोज़गार के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में भी मान्यता दी गई है। वृद्धजन, बाल और अन्य संबंधित देखभाल सेवाओं के लिए 1.5 लाख बहु-कुशल केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव सेवा वितरण को बेहतर बनाएगा और विशेष रूप से महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोज़गार के नए अवसर सृजित करेगा।

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