नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महाराष्ट्र के पालघर में दूसरी पहाड़ी सुरंग का कार्य मंगलवार को पूर्ण हो गया।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत एक महीने में पालघर में दो पर्वतीय सुरंगों का काम पूरा हुआ है। गत दो जनवरी को 454 मीटर लंबे और 14.4 मीटर चौड़े एमटी -5 का काम पूरा हुआ था। एमटी-6 को दोनों सिरों से न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके खोदा गया है, जो एक अत्याधुनिक ड्रिल-एंड-कंट्रोल्ड ब्लास्ट मेथड है। खुदाई 12 महीनों के भीतर पूरी हुई है। इसमें मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अप और डाउन दोनों ट्रैक होंगे।
श्री वैष्णव ने इस उपलब्धि के लिए हाई-स्पीड रेल परियोजना की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिस गति से टीम काम कर रही है, उसने देश में नया आत्मविश्वास जगाया है। निर्माण और प्रौद्योगिकी में कई नए नवाचारों के कारण यह परियोजना वैश्विक स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए उपयोग की जा रही कई उन्नत निर्माण प्रौद्योगिकियां और बड़ी मशीनें भारत में निर्मित हैं।
उन्होंने बुलेट ट्रेन परियोजना के गुजरात खंड में अगले साल वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने की उम्मीद जतायी है। उन्होंने कहा कि हाई-स्पीड रेल परिचालन 2028 तक ठाणे तक और 2029 तक मुंबई तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस मौके पर पालघर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सावरा ने हाई-स्पीड सुरंग का काम पूरा करने में मिली सफलता के लिए श्री वैष्णव को धन्यावाद दिया। उन्होंने हाई-स्पीड रेल गलियारे, समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) और आने वाले वधवान पोर्ट सहित कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं के ज़रिए ज़िले के तेज़ी से हो रहे विकास पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि 2014 से महाराष्ट्र में रेलवे निवेश में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण परियोजनाएं तेज़ी से पूरी हो रही हैं और सेवाएं बेहतर हुई हैं।
गौरललब है कि पालघर ज़िले जैसी जटिल भूवैज्ञानिक स्थितियों और अनियमित सुरंगों के आकार के लिए एनएटीएम को पसंद किया जाता है, जहाँ सुरंग बोरिंग मशीनें ज़्यादा उपयुक्त नहीं होती हैं। इस प्रक्रिया में बहुत भारी मशीनरी की ज़रूरत नहीं होती है और यह शॉटक्रेटिंग, रॉक बोल्ट और जाली गर्डर्स का उपयोग करके रियल टाइम में बदलाव करने की अनुमति देती है।
रेलवे ने बताया कि सुरंग के अंदर श्रमिकों की सुरक्षा विभिन्न भू-तकनीकी उपकरणों, रियल टाइम मॉनिटरिंग, कुशल अग्नि सुरक्षा उपायों, उचित वेंटिलेशन और नियंत्रित पहुंच व्यवस्था का उपयोग करके सुनिश्चित की गयी।
रेलवे के अनुसार महाराष्ट्र में इस परियोजना में कई मोर्चों पर निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उल्हास और जगानी जैसी अन्य प्रमुख नदियों पर नींव स्तर के काम के अलावा, वैतरणा नदी पर परियोजना का सबसे लंबा नदी पुल पियर स्तर तक पहुँच गया है। सभी चार स्टेशनों, लंबे स्पैन स्टील पुलों का उपयोग करके प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग क्रॉसिंग और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स और शिलफाटा के बीच 21 किमी लंबी सुरंग पर भी काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में कुल सात पहाड़ी सुरंगों पर काम चल रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट रेल परियोजना लगभग 508 किलोमीटर की है, जिसमें गुजरात और दादरा और नगर हवेली में 352 किमी और महाराष्ट्र में 156 किमी शामिल है। यह परियोजना आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देगी, ज्ञान हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाएगी, और नए औद्योगिक और सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र के विकास में सहायता करेगा। यह गलियारा साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों को जोड़ेगा। रेलवे ने बताया कि 27 तक, लगभग 334 किमी के वायाडक्ट, 17 नदी पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और दूसरे अवसंरचना पर 12 बड़े क्रॉसिंग के काम पूरे हो चुके हैं। इस परियोजना के तहत के गुजरात क्षेत्र में ट्रैक बिछाने और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम तेज़ी से चल रहा है।
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