मुंबई , जनवरी 28 -- महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से अहम भूमिका निभाते रहे अजित पवार की यात्रा एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव जीतने से शुरू हुयी। बाद में उन्होंने दूध संघों, विभिन्न सहकारी समितियों, चीनी मिलों और सहकारी बैंकों जैसे विभिन्न संस्थानों के चुनाव भी जीते।

उनके इस सफर ने साल 1991 में एक नयी दिशा तब ली जब उन्होंने बारामती लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में जीत हासिल की। बाद में उन्होंने विधायक का चुनाव लड़कर राज्य में विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के राज्य मंत्री और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री जैसे कई पदों को सुशोभित किया। महाराष्ट्र के लोगों के लिए उनके अथक प्रयास और लोगों और मिट्टी से जुड़े रहने की उनकी क्षमता के कारण बच्चों, माताओं, बहनों और युवाओं ने उनको प्यार से 'दादा' का नाम दिया।

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के राहुरी तालुका के देवलाली प्रवरा में हुआ था। उन्हें कम उम्र में ही अपने परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी उठानी पड़ी, और यही वह वक्त था जब उन्हें अपने आसपास की सामाजिक समस्याओं के बारे में पहली बार पता चला। जैसे ही उन्होंने किसानों की दुर्दशा को समझा, उनके मन में उनके प्रति सहानुभूति के बीज बोए गए।

वर्ष 1982 में मात्र 20 वर्ष की आयु में एक चीनी सहकारी संस्था से अपने चुनावी करियर की शुरुआत करने वाले श्री पवार ने प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाई। राज्य में भू-राजनीतिक स्थिति की अपनी गहरी समझ के कारण, वह यह बेहतर ढंग से जानते थे कि कोई भी फैसला मुंबई में मंत्रालय से लेकर मेहनती किसानों तक और महाराष्ट्र के पूर्वी कोने से लेकर पश्चिमी कोने तक सभी स्तरों पर लोगों को कैसे प्रभावित करेगा।

वह 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और लगातार 16 वर्षों तक इस पद पर रहे। इसी वर्ष वह बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए लेकिन अपने चाचा और कद्दावर नेता शरद पवार के लिए उन्होंने यह सीट छोड़ दी। इसके बाद वह महाराष्ट्र विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और 1992-93 में कृषि एवं बिजली राज्य मंत्री बने। श्री पवार ने बारामती निर्वाचन क्षेत्र से 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार जीत दर्ज की। उन्होंने अपने करियर में कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।

श्री पवार छह बार राज्य के उपमुख्यमंत्री पद पर रहे। वह पहली बार नवंबर 2010 से सितंबर 2012 तक कांग्रेस की पृथ्वीराज चव्हाण सरकार में इस पद पर रहे। इसके बाद अक्टूबर 2012 से सितंबर 2014 तक वह पुनः उपमुख्यमंत्री बने। वह नवंबर 2019 में कुछ ही दिनों के लिए उपमुख्यमंत्री बने। दिसंबर 2019 से जून 2022 तक महा विकास अघाड़ी सरकार (उद्धव ठाकरे नेतृत्व) में उपमुख्यमंत्री रहे। वह जुलाई 2023 - 5 दिसंबर 2024 तक राजग-शिंदे सरकार में फिर से उपमुख्यमंत्री की भूमिका संभाली। वह छठी बार दिसंबर 2024 से देवेंद्र फडणवीस वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री बने थे।

श्री पवार ने अपने चाचा शरद पवार की छत्रछाया में राजनीति के गुर सीखे और वर्षों तक उनके साथ रहने के बाद उन्होंने वर्ष 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बना लिया। बाद में उनके ही गुट को ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ही मान्यता मिल गयी।

प्रशासनिक अनुभव और मजबूत संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले श्री पवार का नाम सिंचाई घोटाले और लवासा लेक सिटी प्रोजेक्ट जैसे विवादों से भी जुड़ा रहा, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। उन्हें महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति के सबसे अहम चेहरों में गिना जाता था जिन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया।

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