भुवनेश्वर , दिसंबर 10 -- ओडिशा सरकार ने महानदी जल विवाद से जुड़े सभी ज़रूरी पहलुओं की जांच के लिये बुधवार को उपमुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव की अध्यक्षता में आठ सदस्यों वाली एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया।

यह समिति सभी पहलुओं की जांच करके राज्य द्वारा तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर किये जा रहे प्रयासों को ज़रूरी नीतिगत मार्गदर्शन देगी।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी कार्यालय ने एक बयान में कहा कि इस समिति का गठन ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी के पानी के बंटवारे से जुड़े विवाद की 'जटिलता और संवेदनशीलता' को देखते हुए किया गया है। इस मुद्दे को हल करने के लिये 2018 में महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की स्थापना की गयी थी, लेकिन यह विवाद बना ही रहा है।

श्री सिंह देव मुख्यमंत्री के निर्देशन में बनी इस समिति की अध्यक्षता करेंगे, वहीं राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य व्हिप संपद स्वैन, बीजू जनता दल विधायक निरंजन पुजारी, भाजपा विधायक जयनारायण मिश्रा और कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस इस समिति का हिस्सा होंगे।

इससे पूर्व नवंबर 2024 में राज्य सरकार ने 'पड़ोसी राज्यों के साथ लंबे समय से चल रहे अंतरराज्यीय विवादों के समाधान' के लिये एक अंतर-मंत्रीय समिति का गठन भी किया था। उस समिति को पड़ोसी राज्यों से पोलवरम परियोजना, महानदी विवाद और कोटिया क्षेत्र जैसे ज़मीनी विवादों के समाधान का काम सौंपा गया था।

उल्लेखनीय है कि ओडिशा लंबे समय से पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ अलग-अलग विवादों में उलझा रहा है। ये विवाद पानी बांटने से लेकर बांधों के निर्माण और सीमा निर्धारण तक से जुड़े हुए हैं।

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