उज्जैन , अप्रैल 3 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि महाकाल 'द मास्टर ऑफ टाइम' से 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' तक पहुंचना इस अंतरराष्ट्रीय विमर्श का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उज्जैन वह स्थान है, जहां मध्य रेखा और कर्क रेखा का संगम माना जाता है और प्राचीन काल में यहीं से विश्व की काल गणना होती थी।

महाकाल 'द मास्टर ऑफ टाइम' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि अब समय आ गया है कि 'ग्रीनविच मीन टाइम' के स्थान पर 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' की तार्किक स्थापना पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण भी यह संकेत देते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र रहा है, इसलिए भारत को अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उज्जैन वह स्थल है जहां अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। काशी, कांची और पुरी जैसे प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवंत प्रयोगशालाएं बताया, जहां विज्ञान, संस्कृति, कला और आध्यात्मिकता का संगम होता है।

श्री प्रधान ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अटूट संबंध पर बल देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने महाकाल मंदिर में वैशाख मास के प्रथम दिवस से भगवान शिव पर निरंतर जलधारा प्रवाहित करने की परंपरा का उल्लेख करते हुए इसे ग्रीष्मकालीन प्रबंधन का वैज्ञानिक उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने की वैज्ञानिक समझ रखता रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व को रेखांकित किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अंतरिक्ष, ड्रोन और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में देश वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उज्जैन में विज्ञान केंद्र और तारामंडल का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री श्री प्रधान ने विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट, ब्रोशर एवं पुस्तिका का विमोचन किया तथा इस बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी देखा।

इस अवसर पर उज्जैन में 15 करोड़ रुपये से अधिक लागत से निर्मित साइंस सेंटर का लोकार्पण किया गया और 'महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम' विषय पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। प्रदर्शनी में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक परंपरा, आधुनिक तकनीक और उज्जैन को वैश्विक समय केंद्र के रूप में स्थापित करने से जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान सैटेलाइट निर्माण कार्यशाला का भी अवलोकन किया गया, जिसमें विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के 120 से अधिक विद्यार्थियों ने नैनो सैटेलाइट निर्माण की प्रक्रिया सीखी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित