चंडीगढ़ , अप्रैल 10 -- पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं वरिष्ठ नेता विनीत जोशी ने कहा कि राज्य की भगवंत मान सरकार सात लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) को एक जनवरी 2023 से टाल रही। मान सरकार अब इस मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में केस हारने के बाद न्यायालय के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती देने की तैयारी कर रही है, जिससे उसका कर्मचारी विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है।
श्री जोशी ने बताया कि राज्य के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि कर्मचारियों एवं पेंशनरों के महंगाई भत्ते की पांच किस्तें बकाया पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का हक है, जो हर साल महंगाई बढ़ने के साथ बढ़ता है लेकिन विडंबना यह है कि पंजाब में यह एक जुलाई 2023 से एक जुलाई 2025 तक बकाया पड़ा है।
भाजपा नेता ने कहा कि महंगाई भत्ता देकर सरकार कोई सौगात या तोहफा नहीं देती, बल्कि कर्मचारियों का हक अदा करती है लेकिन सरकार इस भुगतान को टालकर लाखों कर्मचारियों के साथ धोखा कर रही है। श्री जोशी ने कहा कि पंजाब में 1967 से ही महंगाई भत्ता केंद्रीय पैटर्न पर मिलता आ रहा है। अब जिस तरह सरकार ने इसे देना बंद किया हुआ है, उससे आशंका है कि मान सरकार इसे केंद्रीय पैटर्न से अलग (डी-लिंक) करने की कोशिश में है।
श्री जोशी ने कहा कि पंजाब में जितने भी वेतन आयोग बने, सभी ने इस बात की वकालत की है कि राज्य के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता केंद्रीय पैटर्न पर ही मिलना चाहिए। छठे वेतन आयोग ने भी यही सिफारिश की थी, लेकिन पंजाब सरकार ने इन सभी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया है।
केंद्र की भाजपा सरकार ने आठवां वेतन आयोग बना दिया है, जबकि पंजाब की आप सरकार एक जनवरी 2026 से सातवें वेतन आयोग का गठन भी नहीं कर पाई है।
श्री जोशी ने कहा कि भाजपा मान सरकार की इस कर्मचारी विरोधी नीति को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार 30 जून 2026 तक कर्मचारियों का लंबित महंगाई भत्ता देने की प्रक्रिया को टालने की कोशिश की, तो इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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