दरभंगा , मार्च 19 -- आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट-हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीफेट) के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा है कि मशीनी बीज निकासी यंत्र के आने से मखाना खेती में बड़े बदलाव की संभावना है।

डॉ. नचिकेत ने इसे मखाना क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे प्रक्रिया तेज और सरल होगी, खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे युवा किसानों का भी इस क्षेत्र की ओर आकर्षण बढ़ सकता है।

राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएम) के अधिकारियों के अनुसार मखाना की बुहाई (हार्वेस्टिंग) एक बेहद कठिन और समय लेने वाली प्रक्रिया रही है। इसमें श्रमिकों को लंबे समय तक पानी में खड़े रहकर कई हफ्तों तक दो से तीन बार बीज निकालने की प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है, जिससे श्रम की लागत काफी बढ़ जाती है और काम बेहद थकाऊ हो जाता है।

अनुसंधान केंद्र से जारी सूचना के अनुसार नए विकसित डीजल चालित यंत्र से इस स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यह मशीन एक ही बार में बीज निकालने में सक्षम है। इसे तालाब और खेत दोनों तरह की खेती के लिए डिजाइन किया गया है और यह कम समय में बड़ी मात्रा में बीज निकाल सकती है, जिससे श्रमिकों पर निर्भरता घटेगी, समय की बचत होगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी।

यह मशीन आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट-हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीफेट), लुधियाना के वैज्ञानिकों ने विकसित की है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएम) के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज कुमार ने बताया कि संस्थान ने एक निजी निर्माता को इसके व्यावसायिक उत्पादन का लाइसेंस प्रदान कर दिया है, जिससे यह मशीन जल्द ही किसानों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।

बिहार का मिथिला क्षेत्र, जो देश में मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, अब खेती के तरीकों में बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। मखाना के उत्पादन की सबसे श्रमसाध्य प्रक्रिया-बीज निकासी-को आसान बनाने के लिए एक मशीनी बीज निकासी यंत्र विकसित किया गया है। यह जानकारी दी।

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