नैनीताल , दिसंबर 08 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय क्षय (टीबी) रोग निवारण के लिए जाने जाने वाले भवाली में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाये जाने के मामले में गंभीर है और प्रदेश सरकार को इस मामले में कतई मोहलत देने के मूड में नहीं है।

अदालत ने इस मामले में सुनवाई के बाद सोमवार को सरकार को एक सप्ताह में वित्तीय स्वीकृति के साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के संबंध में जवाब देने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (स्टेट लीगल सर्विस अथाॅरिटी) की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार भवाली में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी को लेकर 200 बिस्तरों का सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल तैयार करने पर विचार कर रही है। 250 करोड़ रुपए का प्रस्ताव वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है।

आगे कहा गया कि निर्माण एजेंसी ब्रिज एंड रूफ (बीआर) ने सेनिटोरियम की भूमि का भौतिक सत्यापन कर लिया है और भूमि को अस्पताल निर्माण के लिए उपयुक्त पाया गया है। निर्माण एजेंसी की ओर से जल्द ही डीपीआर तैयार करने का कार्य किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए वित्तीय स्वीकृति और डीपीआर को लेकर जवाब देने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि प्रदेश के जिला अस्पतालों में सुविधाएं न के बराबर है। नैनीताल में भी जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं।

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