पटना , दिसंबर 18 -- बिहार के स्वास्थ्य एवं विधि मंत्री और पश्चिम बंगाल के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रभारी मंगल पांडेय ने गुरूवार को कहा कि पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी होने के बाद यह बात स्पष्ट हो गयी है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घुसपैठियों को शरण दी थी।

श्री पांडेय ने आज बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में 58 लाख से ज्यादा लोगों के नाम काट दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि एक करोड़ 90 लाख से ज्यादा वोटर्स को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। राज्य में कुल वोटरों की संख्या करीब सात करोड़ 66 लाख है। उन्होंने कहा कि इन संदिग्ध वोटर्स में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हो सकते हैं।चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भरे गए गणना प्रपत्र (एन्यूमेरेशन फॉर्म्स) की जांच से कई गड़बड़ियां पकड़ी हैं।

श्री पांडेय ने कहा कि बंगाल में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को संदिग्ध श्रेणी में इसलिए रखा गया है, क्योंकि गणना प्रपत्र में दी गई जानकारी संदेह पैदा करने वाली है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को करीब 12 लाख ऐसे फॉर्म मिले, जिनमें पिता और बच्चे की उम्र का अंतर 15 साल से कम है। इस प्रकार आठ लाख 77 हजार से ज्यादा फॉर्म में माता-पिता और बच्चों की उम्र का अंतर 50 साल से ज्यादा है। करीब 85 लाख फॉर्म में पिता का नाम या तो दर्ज नहीं है या रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो रहा।

मंत्री श्री पांडेय ने कहा कि बंगाल में एक करोड़ 90 लाख संदिग्ध मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है और उन्हें सफाई का मौका दिया जाएगा, लेकिन जमीनी जांच से हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। यह साफ हो चुका है कि बंगाल में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं। लेकिन 58 लाख नाम कटने और एक करोड़ 90 लाख संदिग्ध लोगों की सूची बनने पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) परेशान है। ममता बनर्जी की सरकार राज्य में फर्जी वोटरों के सहारे सत्ता में हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान सरकार के इशारे पर चुनाव प्रभावित करने के लिए जम कर हिंसा होती है, लेकिन अब बंगाल की वर्तमान सरकार सत्ता से बाहर जाएगी और आगमी चुनाव में भाजपा वहां प्रचंड जीत हासिल करेगी।

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