कोलकाता , नवंबर 04 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ एक सशक्त विरोध प्रदर्शन करते हुए एस्प्लेनेड स्थित बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा से लेकर रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक निवास जोरासांको ठाकुरबाड़ी तक 3.8 किलोमीटर की पैदल यात्रा की।
सुश्री बनर्जी ने दोपहर 2:45 बजे अंबेडकर की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर अपना मार्च शुरू किया। उनके साथ एक झांकी भी थी जिस पर बड़े-बड़े पोस्टरों पर 'हम एसआईआर के नाम पर नागरिकता रद्द करने को अस्वीकार करते हैं' और 'हमारा वोट हमारा अधिकार है' जैसे नारे लिखे हुए थे।
रैली में सबसे आगे पुजारी, इमाम और साधु जैसे धार्मिक नेता चल रहे थे। इनके पीछे सुश्री बनर्जी स्वयं संविधान हाथ में लिए मार्च का नेतृत्व कर रही थीं। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम और खेल मंत्री अरूप बिस्वास भी थे।
उनके पीछे फिल्म और टेलीविजन के कलाकार और खिलाड़ी चल रहे थे, जबकि इनके पीछे तृणमूल समर्थकों का हुजूम झंडे लहरा रहा था और नारे लगा रहा था। सबसे अंतिम में सांसद, विधायक और अन्य नेता चल रहे थे।
रैली में मतुआ समुदाय के कई सदस्य शामिल थे। यह एक ऐसा समूह है, जिसे मतदाता सूची संशोधन के संभावित परिणामों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है। सुश्री बनर्जी ने बाद में जोरासांको में अपने भाषण के दौरान मतुआ समुदाय के इन सदस्यों को सबसे आगे बैठने के लिए आमंत्रित किया।
इस रैली के दौरान मुख्यंत्री का लिखा हुआ गाना भी स्पीकरों पर सुनाई दे रहा था। यह गाना एक दिन पहले ही एक्स पर रिलीज़ हुआ था।
मंत्री और गायक इंद्रनील सेन ने 'जोत बांधो/बंध वंगो' (एकजुट हो जाओ और बाधाओं को तोड़ो) नामक इस गाने को गाया है, जिसमें नागरिकों से आग्रह किया कि वे डर के आगे न झुकें और न ही अपने मताधिकार को छीनने के कथित प्रयासों को स्वीकार करें।
सुश्री बनर्जी ने इस गीत को भाजपा की 'लोगों के अधिकार छीनने की साज़िश' के ख़िलाफ़ अपनी पार्टी की 'विरोध की आवाज़' बताया था।
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