बारां , दिसम्बर 14 -- मध्य प्रदेश के कूनो के जंगलों से निकलकर करीब दो सप्ताह पहले राजस्थान के बारां जिले की सीमा में आये अफ्रीकी चीता केपी -2 को कूनो से आया विशेष दल ट्रेंकुलाइज करके उसे वापस कूनो की ओर ले गया है।

बारां जिला मुख्यालय पर प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) विवेकानंद माणिकराव बड़े ने शनिवार को बताया कि कूनो से शुक्रवार को एक और दल बारां पहुंचा। इससे पहले चीते की सुरक्षा के लिए 16 दिनों से कूनो और बारां वन विभाग के दल निगरानी कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि कूनो से आये विशेष दल ने चीता केपी- 2 के कूनो नहीं लौटने को देखते हुए शुक्रवार को ट्रेंकुलाइज करने का फैसला लिया और शाम तक उसे ट्रेंकुलाइज कर लिया। शनिवार तड़के दल उसे लेकर मध्य प्रदेश में कूनो पहुंच गया।

वन विभाग के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि 27 नवम्बर को चीता केपी -2 कूनो के जंगलों से निकलकर राजस्थान के बारां जिले की सरहद से सटे शाहाबाद, किशनगंज क्षेत्र के रामगढ़ क्रेटर इलाके में आ गया था। यहां उसे अनुकूल वातावरण मिल गया और यहीं उसने अपना अस्थाई ठिकाना बना लिया।

सूत्रों के मुताबिक शुरुआत के दिनों में रामगढ़ क्रेटर में रहते हुए उसने दो शिकार किये। इसके बाद चीता भंडदेवरा और रामगढ़ माता मंदिर के आसपास विचरण करते देखा गया था। कुछ दिनों बाद वह वहां से निकलकर पांच किलोमीटर दूर अर्जुनपुरा गांव के नजदीक खेतों में देखा गया। इस अर्जुनपुरा गांव के आसपास चीता केपी -2 ने तीन शिकार ओर किए। लोगों में चीते को लेकर भय भी था, ऐसे में कूनो आई दल ने उसे ट्रेंकुलाइज कर लिया।

श्री बड़े ने बताया कि बारां वन विभाग के दलों की जिम्मेदारी चीता की सुरक्षा एवं निगरानी के लिए ही थी। बाकी के फैसले कूनो वन विभाग को लेने थे।

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