, April 12 -- इस बीच गुलशन की मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याण जी- आनंद जी से हुयी, जिनके संगीत निर्देशन में लिये गुलशन मेहता ने फिल्म सट्टा -बाजार के लिये ..तुम्हे याद होगा कभी हम मिले थे .. गीत लिखा लेकिन इस फिल्म के जरिये वह कुछ खास पहचान नही बना पाये। फिल्म ..सट्टा बाजार.. में गुलशन के गीत को सुनकर फिल्म के वितरक शांतिभाई दबे काफी खुश हुये।उन्हें विश्वास नही हुआ कि इतनी छोटी सी उम्र में कोई व्यक्ति इस गीत को इतनी गहराई के साथ लिख सकता है ।

शांति भाई ने गुलशन मेहता को ..बावरा .. कहकर संबोधित किया। इसके बाद से गुलशन मेहता ..गुलशन बावरा .. के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में प्रसिद्ध हो गये । लगभग आठ वर्ष तक मायानगरी मुंबई में गुलशन बावरा ने अथक परिश्रम किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें कल्याण जी-आनंद जी के संगीत निर्देशन में निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म..उपकार .. में गीत लिखने का मौका मिला ।मनोज कुमार ने गुलशन बावरा के साथ फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष किया था और दोनों में काफी घनिष्ठता थी।

मनोज कुमार ने गुलशन बावरा से गीत की कोई पंक्ति सुनाने के लिए कहा। तब गुलशन बावरा ने ..मेरे देश की धरती सोना उगले .. गाकर सुनाया।गीत के बोल सुनने के बाद मनोज कुमार बहुत खुश हुये और उन्होंने गुलशन बावरा से फिल्म ..उपकार .. में गीत लिखने की पेशकश की।फिल्म उपकार में अपने गीत ..मेरे देश की धरती सोना उगले .. की सफलता के बाद गुलशन बावराने कभी पीछे मुड़कर नही देखा ।

गुलशन बावरा को इसके बाद कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये । वर्ष 1969 में प्रदर्शित फिल्म ..विश्वास .. में कल्याण जी आनंद जी के हीं संगीत निर्देशन में गुलशन बावरा ने .. चांदी की दीवार ना तोड़ी जैसे भावपूर्ण गीत की रचना कर अपना अलग ही समां बांधा। इसके बाद गुलशन बावरा ने सफलता की नयी बुलंदियों को छुआ और एक से बढकर एक गीत लिखे।बहुमुखी प्रतिभा के धनी गुलशन बावरा ने कई फिल्मों में अभिनय भी किया है ।इन फिल्मों मे उपकार विश्वास .पवित्र पापी.बेइमान.जंजीर.अगर तुम ना होते.बीवी हो तो ऐसी .इंद्रजीत आदि प्रमुख है। इसके अलावा गुलशन बावरा ने पुकार. सत्ते पे सत्ता मे पार्श्वगायन किया।

गुलशन बावरा को दो बार फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ गीतकार से नवाजा गया ।इनमें वर्ष 1967 में प्रदर्शित फिल्म ..उपकार ..का गीत ..मेरे देश की धरती सोना उगले ..वर्ष 1973 मे प्रदर्शित फिल्म जंजीर का गीत ..यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी ..शामिल है।अपने रचित गीतो से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले गुलशन बावरा 07 अगस्त 2009 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।

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