एमसीबी , दिसंबर 14 -- छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में ग्रामीण विकास को सशक्त आधार प्रदान करते हुए जिला प्रशासन ने रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण परिवारों को तात्कालिक रोजगार उपलब्ध कराने के साथ दीर्घकालिक आय के साधनों से जोड़ने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले में बड़े पैमाने पर रोजगारमूलक एवं आजीविका आधारित कार्यों को स्वीकृति दी गई है।

जिला पीआरओ द्वारा रविवार को दी गई जानकारी के अनुसार, दिसंबर माह में मनरेगा अंतर्गत रोजगार सृजन को गति देने के लिए जिले की तीनों जनपद पंचायतों में महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं। जनपद पंचायत खड़गवां को 3 करोड़ रुपये, मनेंद्रगढ़ को 3.26 करोड़ रुपये तथा भरतपुर को 6.95 करोड़ रुपये के नए रोजगारमूलक कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से हजारों जॉब कार्डधारी परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की उम्मीद है।

राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिले में आजीविका डबरी निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन जैसे स्थायी आय के साधनों से जोड़ा जा सके। जिले में 1000 से अधिक नवीन आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से अब तक 164 से अधिक डबरियों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इन डबरियों के साथ फलदार पौधों का रोपण भी कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आय के अवसर सृजित होंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित