संतकबीर नगर , मार्च 8 -- उत्तर प्रदेश में संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद विकास खंड की ग्राम पंचायत तामा में मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत परियोजना के बजाय अन्य स्थान पर कार्य कराए जाने के मामले में जिलाधिकारी ने कड़ी कार्रवाई की है। दोषी ग्राम प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक (टीए) और रोजगार सेवक से धनराशि की वसूली कर श्रमिकों को भुगतान कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम पंचायत तामा उर्फ तामेश्वरनाथ में मनरेगा के तहत झझवा तालाब के तीसरे भाग की खुदाई और सफाई की परियोजना स्वीकृत थी, लेकिन गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए स्वीकृत स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर कार्य कराया गया। यह कार्य नौ जुलाई से 24 जुलाई 2025 के बीच कराया गया, जिसमें मस्टर रोल संख्या 3791, 3792, 3793 और 3794 पर 45 श्रमिकों को कार्यरत दर्शाया गया।
जांच में पाया गया कि रोजगार सेवक रंजीता गोस्वामी द्वारा उपस्थिति दर्ज की गई, जिस पर ग्राम प्रधान अंजू पासवान और पंचायत सचिव अमरनाथ गुप्ता के हस्ताक्षर थे। तकनीकी सहायक रज्जन कुमार श्रीवास्तव ने 1.40 लाख रुपये से अधिक का मापांकन किया और इसके आधार पर 28 जुलाई 2025 को वेजलिस्ट तैयार की गई। इसके बावजूद मजदूरों का भुगतान नहीं किया गया और वेजलिस्ट को बिना कारण डिलीट कर दिया गया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक से धनराशि वसूल कर श्रमिकों को भुगतान किया जाएगा। साथ ही शिथिल अनुश्रवण के लिए तत्कालीन खंड विकास अधिकारी को चेतावनी और पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए गए हैं। तकनीकी सहायक को अग्रिम आदेश तक अन्य परियोजनाओं की मापी से भी रोक दिया गया है।
प्रकरण में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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