नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) ने मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (वीबी-जी राम जी) की प्रतियां जलाकर इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह मनरेगा को समाप्त करने की साजिश है।
केकेसी के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. उदित राज ने बुधवार को यहां कृषि भवन पर आयोजित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में कहा कि उपरोक्त विधेयक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) को निरस्त करने का प्रयास करता है। कामगार संगठनों और कामगारों से किसी भी प्रकार के परामर्श के बिना प्रस्तुत यह विधेयक, एक अधिकारआधारित क़ानून ( प्रवर्तनीय अधिकार ) से यह विधेयक एक ऐसे बजट-सीमित कार्यक्रम की ओर मूलभूत बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें केंद्र सरकार की कोई जवाबदेही नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक में केंद्र सरकार को राज्यों को दिए जाने वाले धन की मात्रा मनमाने ढंग से तय करने का अधिकार है और इसी के आधार पर यह तय होगा कि किसी राज्य में कितने दिनों का रोज़गार दिया जा सकता है। यह मनरेगा की मूल सोच को पूरी तरह पलट देता है, जहाँ धन आवंटन मांग के अनुसार होता था, और उसकी जगह एक ऐसी आपूर्ति-आधारित व्यवस्था ले आता है, जिसमें रोज़गार की मांग को पहले से तय बजट के अनुसार ढलना पड़ेगा। यह विधेयक संविधान की भावना का उल्लंघन करता है, 73वें संविधान संशोधन को कमजोर करता है। यह सामाजिक व आर्थिक न्याय की मूल अवधारणा पर प्रहार करता है, क्योंकि यह शक्ति को मज़दूरों, ग्राम सभाओं और राज्यों से छीनकर केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित करता है।
उन्हाेंने कहा कि असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस मनरेगा के स्थान पर नये विधेयक, 2025 को पूरी तरह अस्वीकार करता है और इसकी तत्काल वापसी की मांग करता है। मज़दूरों और उनके संगठनों की सहमति और भागीदारी के बिना मनरेगा को निरस्त करने या उसमें मूलभूत बदलाव करने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य है। हम सभी लोकतांत्रिक शक्तियों से आह्वान करते हैं कि वे इन एकतरफ़ा और प्रतिगामी प्रस्तावों का विरोध करें और लाखों ग्रामीण मज़दूरों की आजीविका सुरक्षा के आधारस्तंभ के रूप में मनरेगा की रक्षा करें।
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