चंडीगढ़ , दिसंबर 16 -- पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने और इसकी जगह तथाकथित विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (वीबी-जी राम जी) लाने के केंद्र सरकार के कदम की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे देशभर के ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों, सम्मान और रोजी-रोटी की सुरक्षा को कमजोर करने के इरादे से उठाया गया "सोचा-समझा कदम" बताया है।
'आप' के प्रवक्ता नील गर्ग ने मंगलवार को पार्टी नेता हरप्रीत सिंह के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार लगातार खोखले नारों और सियासी नाटकों पर निर्भर रही है। अब यह सरकार समाज के सबसे गरीब वर्गों के लिए बनाई गई कल्याणकारी गारंटियों को योजनाबद्ध तरीके से खत्म कर रही है।
श्री गर्ग ने कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने या महात्मा गांधी का नाम हटाने का मामला नहीं है। असली मुद्दा यह है कि केंद्र ने दरअसल मनरेगा के खात्मे का ऐलान कर दिया है और टीवी बहसों और ध्यान भटकाने वाली चीजों की आड़ में अपना मजदूर विरोधी एजेंडा छुपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि 12 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण मजदूर, जिनके पास फिलहाल मनरेगा जॉब कार्ड हैं, इस नए बिल से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। भले ही सरकार काम के गारंटीशुदा दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा कर रही है लेकिन प्रस्तावित कानून की बारीकियां एक खतरनाक हकीकत को उजागर करती हैं।
उन्होंने कहा कि नए विधेयक की धारा 68 काम की गारंटी नहीं देती, बल्कि इसमें काम देने से इनकार करने की बात शामिल है। उन्होंने बताया कि इसमें कहा गया है कि खेती के सीजन के 60 दिनों के दौरान रोजगार देने की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। सवाल यह है कि यह कौन तय करेगा कि किसी मजदूर को खेती में काम मिला या नहीं? उसका परिवार उन 60 दिनों में कैसे गुजारा करेगा?'आप' प्रवक्ता ने उजागर किया कि नया विधेयक संघीय सिद्धांतों को बुरी तरह कमजोर करता है। पहले केंद्र 90 प्रतिशत खर्च उठाता था, जबकि राज्य 10 प्रतिशत का योगदान देते थे। नई योजना के तहत यह बोझ 60:40 के अनुपात में बदल जाएगा, जिससे पहले से वित्तीय संकट झेल रहे राज्य और गहरे संकट में धंस जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्यों को केंद्र द्वारा तय फंड से ज्यादा रोजगार की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें शत-प्रतिशत खर्च खुद उठाना होगा, जिससे बड़े पैमाने पर ग्रामीण रोजगार असंभव हो जाएगा।
श्री गर्ग ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जहां केंद्र द्वारा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों में केस हारने के बावजूद मनरेगा फंड सालों तक रोके गए थे। श्री गर्ग ने एलान किया कि 'आप' के सांसद लोकसभा और राज्यसभा में इस विधेयक का कड़ा विरोध करेंगे। पंजाब सरकार भी इस मजदूर विरोधी कदम का विरोध करेगी। यह योजना मजदूर विरोधी, संघ विरोधी और भारत विरोधी है। 'आप' केंद्र को धोखे से ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी तबाह करने की इजाजत नहीं देगी।
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